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Bihar News : चुनाव जीतकर भी महिला वार्ड पार्षद से कुर्सी छिनी; संतान बनी वजह, अब कार्रवाई भी होगी

Sun, 02 Jun 2024 09:29 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, सीतामढ़ी

सार

Bihar : राज्य निर्वाचन आयोग ने वार्ड पार्षद को अयोग्य घोषित करते हुये पदमुक्त कर दिया है। आयोग ने डीएम सह निर्वाची पदाधिकारी को पदमुक्त की गयी वार्ड पार्षद के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया है।
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सीतामढ़ी नगर पंचायत - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
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सीतामढ़ी में एक वार्ड पार्षद की कुर्सी छिन गई। उन पर गलत शपथ पत्र प्रस्तुत कर पंचायत चुनाव में भाग लेकर चुनाव जीतने का आरोप है। अब राज्य निर्वाचन आयोग ने उन्हें  अयोग्य घोषित करते हुये पदमुक्त कर दिया है। साथ ही आयोग ने डीएम सह निर्वाची पदाधिकारी को पदमुक्त की गयी वार्ड पार्षद के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। मामला सुरसंड नगर पंचायत की है।  

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राज्य निर्वाचन आयोग ने किया अयोग्य घोषित
उषा देवी सुरसंड वार्ड संख्या 11 के वार्ड पार्षद है। जिन्हे राज्य निर्वाचन आयोग ने अयोग्य घोषित करते हुये पदमुक्त कर दिया है। साथ ही आयोग ने डीएम सह निर्वाची पदाधिकारी को पदमुक्त की गयी वार्ड पार्षद उषा देवी के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। उक्त वार्ड पार्षद के विरुद्ध वार्ड संख्या 14 निवासी रामनरेश बारिक ने राज्य निर्वाचन आयोग में शिकायत करते हुये वाद दायर किया था। दायर किये गये वाद में वार्ड पार्षद पर दो से अधिक संतान होने के बावजूद गलत तथ्य व शपथ पत्र प्रस्तुत कर चुनाव लड़ने का आरोप लगाया गया था।

इस वजह से खोना पड़ा कुर्सी 
वाद की सुनवाई के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग ने दोनों पक्ष की दलीलें सुनने के बाद प्रस्तुत प्रमाणपत्रों और अन्य साक्ष्यों के जांच में पाया कि आरोपी वार्ड पार्षद उषा देवी, पति जयलाल मुखिया को तीन संतान लालमोहन कुमार, सोनी कुमारी व आयुष कुमार हैं। उक्त तीनों संतान का जन्म प्रमाण पत्र सीएचसी सुरसंड से निर्गत है। इस दौरान वार्ड पार्षद के पति ने अपने एक पुत्र को स्वेच्छा से पदार्थ मुखिया को गोद देने की बात बताते हुये उसके पिता के रूप में स्वयं का नाम निरस्त करते हुये पदार्थ मुखिया का नाम अंकित करने का अनुरोध किया था। लेकिन आयोग ने इसे सही नहीं माना। राज्य निर्वाचन आयोग ने इसकी जांच जिला प्रशासन से करायी। जिला प्रशासन ने भी जांच में तीन संतान होने की पुष्टि की है। दोनों पक्षों की बातों को सुनने के बाद राज्य निर्वाचन आयुक्त ने माना है कि उषा देवी चार अप्रैल 2008 के उपरांत दो से अधिक संतान रहने के कारण चुनाव के लिये योग्य नहीं थी।
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तथ्यों को छुपाने और गलत शपथ पत्र देने का है आरोप 
वार्ड पार्षद पर आरोप है कि उन्होंने तथ्यों को छुपाकर गलत शपथ पत्र के आधार पर वार्ड पार्षद वार्ड संख्या 11 नगर पंचायत सुरसंड के पद पर निर्वाचित रहने में कामयाब रही थी। इसलिये आयोग ने इसे बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा 18 (1) (एम) के तहत अर्हता प्राप्त नहीं रहने के कारण उषा देवी को बिहार नगरपालिका अधिनियम की उक्त धारा सहपठित धारा 18 (2) के तहत प्रदत शक्तियों के अधीन अयोग्य घोषित करते हुये पदमुक्त कर दिया है। साथ ही जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह डीएम को नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा 447 तथा अन्य सुसंगत धाराओं के तहत नियमानुसार विधिसम्मत कार्रवाई करते हुये कृत कार्रवाई से आयोग को अवगत कराने का आदेश दिया है।

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