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Bihar : श्रीश्री रवि शंकर ने लिया गजनवी का नाम; जिस शिवलिंग के किये थे टुकड़े, आज उससे हो रही इच्छा पूरी

Sat, 08 Mar 2025 12:04 AM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

 Bihar : गजनवी ने शिवलिंग के टुकड़े किए थे और उन्हें अग्निहोत्री लोगों ने दक्षिण भारत में सुरक्षित रखा। इस शिवलिंग को भारत के स्वतंत्रता संग्राम के बाद निकाला गया, और आज वह सोमनाथ में पधार चुका है, जो सबकी इच्छाओं को पूरा करता है। 
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श्रीश्री रविशंकर के स्वागत में आयोजित कार्यक्रम - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
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श्रीश्री रवि शंकर के बिहार पहुंचने के बाद उनके स्वागत में पटना के गांधी मैदान में उनका भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान एशिया वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने 1000 से अधिक महिलाओं ने एक साथ झिझिया नृत्य प्रस्तुत करने पर एक ऐतिहासिक वर्ल्ड रिकॉर्ड के रूप में दर्ज किया। इस मौके पर श्री श्री रवि शंकर के साथ-साथ उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा, मंत्री प्रेम कुमार और भाजपा के अन्य नेता भी उपस्थित थे।

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इस मौके पर कार्यक्रम के दौरान श्रीश्री रवि शंकर ने महिलाओं से कहा कि आपकी प्रस्तुति ने सभी का दिल छू लिया। उन्होंने आगे कहा कि बिहार मखाना, मधुरता और पवित्रता का स्थान है। उन्होंने युवाओं के कौशल विकास की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि बिहार में हर युवा को रोजगार मिलेगा और इसके लिए विशेष योजनाएं बनाई जाएंगी।

श्रीश्री रवि शंकर ने एक ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए बताया कि गजनवी ने शिवलिंग के टुकड़े किए थे और कैसे उन्हें अग्निहोत्री लोगों ने दक्षिण भारत में सुरक्षित रखा। उन्होंने यह भी कहा कि इस शिवलिंग को भारत के स्वतंत्रता संग्राम के बाद निकाला गया, और आज वह सोमनाथ में पधार चुका है, जो सबकी इच्छाओं को पूरा करता है। उन्होंने कहा कि इससे पहले आपलोग सत्व ऐप' डाउनलोड कीजिये, जो आपके स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती के लिए अध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करेगा।
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इस अवसर पर श्रीश्री रवि शंकर के साथ विभिन्न प्रमुख विश्वविद्यालयों ने समझौता ज्ञापन साइन किया। इन विश्वविद्यालयों में पटना का आईआईटी, चंद्रगुप्त इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, एमिटी विश्वविद्यालय, चाणक्य लॉ विश्वविद्यालय, और शामिल हैं। यह समझौते युवाओं के कौशल विकास को लेकर महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे। कला और संस्कृति विभाग ने इस आयोजन के लिए 40 लाख रुपये का अनुदान दिया। श्रीश्री रवि शंकर ने इस आयोजन को एक नई दिशा की ओर इशारा करते हुए कहा कि युवाओं को कौशल, रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर मिलने चाहिए। इस आयोजन ने न केवल बिहार की सांस्कृतिक धरोहर को बल दिया, बल्कि राज्य के युवाओं के उज्जवल भविष्य के लिए नई संभावनाएं भी खोलीं।

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