ATS ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
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बिहार के बेतिया के शिकारपुर का रहनेवाला 27 साल का इजहारुल हुसैन उस बैंक अकाउंट को ऑपरेट कर रहा था, जिसमें पाकिस्तान से 30 दिनों में करीब 70 लाख रुपए आए हैं। यूपी ATS के इस खुलासे के बाद जिले में हड़कंप मचा हुआ है। इजहारुल हुसैन 8 नवंबर से ही बेतिया जेल में बंद है। उसे शराब के नशे में अरेस्ट किया गया था। इससे पहले यूपी ATS ने गाजियाबाद के फरीदनगर में स्थित केनरा बैंक के अकाउंट का पता लगाया था। यह अकाउंट गाजियाबाद के रहनेवाले रियाजुद्दीन के नाम पर है। हालांकि इस अकाउंट से जो मोबाइल नंबर लिंक था, वह इजहारुल हुसैन का निकला।
रियाजुद्दीन से पूछताछ के बाद कई ऐसे खुलासे हुए जो चौंकाने वाले थे। इसी निशानदेही पर पिछले 10 दिनों में यूपी ATS की टीम ने टेरर मॉड्यूल केस में अब तक सात संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। टीम अब बेतिया निवासी इजहारुल हुसैन को भी रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। इधर, ATS ने दावा किया है कि स्टूडेंट ऑफ अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय नाम के छात्र संगठन की मीटिंग में देश विरोधी एजेंडा चलाया जा रहा था। आरोप है कि छात्र संगठन की मीटिंग में एक-दूसरे से संदिग्ध जुड़े और इसके जरिए ISIS में भर्ती कराई जा रही थी।
रियाजुद्दीन को हर महीने 10 हजार रुपए मिल रहे थे
इधर, ATS की पूछताछ में पता चला कि रियाजुद्दीन परिवारिक विवाद के बाद पिछले एक साल से हापुड़ जिले के कस्बा पिलखुवा में रहकर मशीन खराद का काम कर रहा था। इससे पहले वो दिल्ली की खराद फैक्ट्री में काम करता था, जहां उसकी मुलाकात इजहारुल से हुई थी। उसी ने रियाजुद्दीन का बैंक खाता खुलवाया था। इसके बदले रियाजुद्दीन को हर महीने 10 हजार रुपए मिल रहे थे। हालांकि खाता खुद इजहारुल ऑपरेट कर रहा था। दरअसल, 8 नवंबर को यूपी एटीएस ने शिकारपुर पुलिस की मदद से छापेमारी कर इजहारुल को गिरफ्तार किया था। लेकिन वो शराब के नशे में था। इस कारण एटीएस उसे अपने साथ नहीं ले जा सकी।
सरकारी इमारतों, धार्मिक स्थल को निशाना बनाने के लिए जासूस कर रहे थे
इधर, यूपी ATS की जांच में यह बात सामने आई है कि गिरफ्तार अभियुक्त उत्तर प्रदेश के सरकारी इमारतों, धार्मिक स्थल और प्रमुख प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के लिए जासूसी कर रहे थे। पाकिस्तान से अकाउंट में आए रुपयों का इस्तेमाल इसी काम में किया जा रहा था। एटीएस अधिकारियों का यह भी मानना है कि पाकिस्तान में बैठे हैंडलर रियादुद्दीन और इजहारुल हुसैन से किसी बड़े हमले की प्लानिंग करा रहे थे।एटीएस की जांच में इजहारुल का पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के एजेंटों से सोशल मीडिया के जरिए संपर्क करने की बात भी सामने आई है। मामले में यूपी स्पेशल डीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने बताया कि किसी धार्मिक स्थल को निशाना बनाने के पुख्ता सबूत हाथ नहीं लगे हैं। आगामी त्योहारों को देखते हुए धार्मिक स्थलों पर सतर्कता बरती जा रही है।