उनका तरीका अलग था, मेरा तरीका अलग
पुष्पम प्रिया ने कहा कि इतना अच्छा इंसान मैं शायद कभी बन ना पाऊं। आज जो कुछ भी हमारे साथ हुआ है, पता नहीं उससे उबर पाएंगे या नहीं। लेकिन, यह प्रण अब और भी गहरा हो गया है। मेरे पिताजी भी चाहते थे कि बिहार बदले, तरक्की हो, मैं भी वही चाहती हूं। उनका तरीका अलग था, मेरा तरीका अलग। एक चीज जो उन्होंने हमेशा किया, वह यह कि उन्होंने मेरी बहुत इज्जत की बचपन से ही। यही एक कारण था कि उनके सबसे चहेते नीतीश कुमार जी के तरीकों से जब मैं सहमत नहीं थी तो उन्होंने मेरा प्रतिकार नहीं किया। सभी जानते हैं कि मेरे पिताजी के बहुत चहेते हैं नीतीश कुमार। पुष्पम प्रिया ने कहा कि मेरे पिता ने मेरी उस सोच के बावजूद मेरी इज्जत की। मैंने जो भी निर्णय लिया मेरे पिता ने मेरा विरोध नहीं किया। हम जिस दिन जीतेंगे, उन्हें (सीएम नीतीश कुमार को) हटाएंगे।
जीतने की जरूरत है
पुष्पम प्रिया ने कहा कि बिहार की बदहाली से जीतने की जरूरत है। पता नहीं लोगों को हक समझ में आता है या नहीं। लेकिन, एक आदत जरूर हो गई है। उन्होंने कहा कि लोगों को शायद मेरी भाषा समझ में नहीं आती, क्योंकि आदत हो गई है। मुझे नजर आती, वह संभावना कि हम कितना बेहतर हो सकते हैं। हम कितना आगे जा सकते हैं। शायद यही कारण है कि मैं यहां हूं। नहीं तो फिर यहां होने का कोई कारण ही नहीं है। कोई जो एक बार यहां से निकल जाता है, वह वापस नहीं आता। तो उसी से जीतना है। पुष्पम प्रिया ने कहा कि कोई बाहर से आकर नहीं जीतेगा, सबको मिलकर जीतना पड़ेगा। अपने बिहार में, कौन बिहार के हैं, कौन नहीं हैं... यह तो खुद ही समझना पड़ेगा। पुष्पम ने कहा कि हमारे बहुत सारे कार्यकर्ता हैं, जिनसे हमने वादा किया था कि जबतक जीत नहीं जाएंगे, तब तक मास्क नहीं हटाएंगे। हम आज भी उस बात पर कायम हैं। इसलिए, आज मुखाग्नि के समय भी मेरे चेहरे पर मास्क है। यह प्रण और मजबूत है अब।