पितरों के स्वर्ग जाने का मार्ग प्रकाशमय होता है
आस्था के प्रति लोगों का यह मानना है कि आज के दिन दीपदान करने से पितरों के स्वर्ग जाने का मार्ग प्रकाशमय हो जाता है। दीप जलाकर पितरों को प्रसन्न किया जाता है। पितृ प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं। देश के अलग-अलग राज्यों से आए महिला-पुरुष तीर्थयात्रियों ने अपने पुरखों की आत्मशांति के लिए कामना करते हुए पितरों के लिए घी के दीये जलाए। पितृ दीपावली पर हजारों की संख्या में दीप जलने के बाद पूरा घाट जगमग हो उठा। देवघाट के कोने-कोने में दीप जल रहा है। काफी संख्या तीर्थयात्री पहुंचे हैं।
दीप से जगमगाता देवघाट।
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क्यों कहा जाता है इस पितरों का तीर्थ
स्थानीय लोगों का कहना है कि भगवान विष्णु की नगरी और मोक्ष की भूमि को गया जी कहा जाता है। यहां भगवान विष्णु स्वयं पितृ देव के रूप में विराजमान रहते हैं, इसलिए इसे पितरों का तीर्थ भी कहा जाता है। इस मेला की शुरुआत 17 सितंबर को हुई थी और 2 अक्टूबर को इसका समापन होगा।