जल संसाधन विभाग के मंत्री विजय चौधरी ने बाढ़ को लेकर प्रेस वार्ता की।
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जल संसाधन विभाग के मंत्री विजय चौधरी ने बिहार में बाढ़ को लेकर प्रेस वार्ता की। उन्होंने कहा कि पहली बार ऐसा हुआ है कि पूरे नेपाल में एक साथ इतनी बारिश हुई। इस कारण नेपाल की सभी नदियां उफान पर आ गईं। आलम ऐसा हुआ कि 56 साल में पहली बार कोसी बराज से रिकॉर्ड 6.61 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हुआ। वहीं गंडक बराज से 21 साल में पहली बार रिकॉर्ड 5.62 लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज हुआ। इस कारण कोसी, गंडक बागमती, महानंदा और अन्य नदियां उफनाने लगीं। अब तक सात तटबंध पानी के तेज बहाव में ध्वस्त हो चुके हैं।
करीब 60 से 70 घंटे तक लगातार बारिश हुई
मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि इस साल बाढ़ की विशेष परिस्थिति उत्पन्न हुई है। बरसात का मौसम ही बाढ़ का मौसम होता है। जल संसाधन विभाग ने हर साल की भांति इस बार भी बाढ़ के पूर्व की तैयारी की थी। पिछले तीन-चार साल से कम बारिश हुई। इस बार अच्छे बारिश का अनुमान था। हमारे यहां मानसून से ज्यादा नेपाल की बारिश का प्रभाव पड़ा हैं। इस बार ऐसी स्थिति बनी कि नेपाल में करीब 60 से 70 घंटे तक लगातार बारिश हुई। विभाग ने पूर्वानुमान लगाया और सभी जिलाधिकारी को अलर्ट कर दिया था। लेकिन, अनुमान से अधिक बारिश हुई। नतीजा यह हुआ कोसी और गंडक उफना गई। यह 50 घंटे काफी चुनौतीपूर्ण बीते।
56 साल में सबसे अधिक पानी कोसी में आया है
मंत्री ने कहा कि लगातार बाढ़ के हालत की निगरानी की गई। लेकिन, पानी का दबाव ही इतना था कि पिछले कई सालों का रिकॉर्ड ही टूट गया। सारे रिकॉर्ड टूट गए। 56 साल में सबसे अधिक पानी कोसी में आया है। मंत्री ने कहा कि पहली बार ऐसा हुआ कि कोसी का पानी बराज के गेट के ऊपर से पानी निकल रहा था। इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ। लेकिन, हमलोग कुछ हद तक हालात को नियंत्रित कर पाए। कई जगह तो तटबंध के ऊपर से पानी बढ़ने लगा। पानी के दबाव को तटबंध झेल नहीं पाया। लापरवाही के आरोप में बगहा में इंजीनियर को निलंबित कर दिया गया। मंत्री ने कहा कि कटाव की संभावना घटने जलस्तर में अधिक होती है। इसके लिए सभी जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों को अलर्ट कर दिया गया है।
सभी अधिकारियों को अलर्ट रहने के लिए कहा गया है
मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि हमारे अधिकारी हर जगह अलर्ट है। इस समय को अभी अंत नहीं मान रहे हैं। क्षेत्रीय पदाधिकारियों को भी अलर्ट कर दिया गया है। जब सारी तैयारी के बावजूद सारे रिकॉर्ड टूट गए तो कुछ भी हो सकता है। इसीलिए सभी अधिकारियों को अलर्ट रहने के लिए कहा गया है। इस बार के हमारे अनुभव ने हमें यह सीख दी है कि हमारे तटबंधों को मजबूत करना होगा। आगे इससे भी अधिक जलस्त्राव हो सकता है इसीलिए हमें हर समय तैयार रहना होगा।