वंशावली में चार बेटे, लेकिन योजना का लाभ लेने के लिए बन गई जवान बेटी की मां।
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तीन उदाहरण से निकले तीन सवालों का जवाब एक ही है
25 साल की महिला 18 साल की बेटी की मां कैसे बन सकती है? 21 साल की नव-विवाहिता को 18 साल की बेटी कैसे हो सकती है? जिसके वंश में सिर्फ बेटे ही हों, उसकी अचानक एक बेटी कैसे हो सकती है? तो, जवाब है- राज्य सरकार की योजना के तहत। जी हां, यही बात है। इन सभी ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत श्रम विभाग से 50 हजार रुपये का अनुदान हासिल करने के लिए यह चमत्कार किए। कोटवा प्रखंड में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत इन्हें भुगतान भी हो चुका है। इस योजना और इसमें ऐसा घालमेल कर फर्जी कागजातों पर भुगतान सिर्फ इसी प्रखंड का मामला नहीं है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि 'अमर उजाला' की टीम ने इसी महीने के सेवानिवृत हो रहे श्रम अधीक्षक अनिल कुमार सिंह ने फोन कॉल पर कहा कि यह सारा मामला गलत है। श्रम विभाग ने कोई गलत भुगतान नहीं किया है। ऐसे में हम सबूत के तौर पर भुगतान की जानकारी भी सामने ला रहे हैं।
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योजना में इस तरह भुगतान किया गया। एक प्रमाण यह देखिए।
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कैसे और क्या मिलना है फायदा, कैसे हो रहा खेल- जानिए
मोतिहारी सहित पूरे बिहार में निर्माण कार्य से जुड़े लोगों का लेबर कार्ड बनाया जाता है। उसी लेबर कार्ड के तहत श्रम विभाग में निबंधित मजदूरों की हादसों में मौत पर चार लाख रुपये, स्वाभाविक मौत पर दो लाख रुपये और दो बेटियों की शादी के लिए मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत पचास-पचास हजार रुपये अनुदान के रूप में दिए जाते हैं। पूर्वी चंपारण में कई प्रखंडों में अनुदान दिलाने में खेल हो रहा है। लाभुकों से 50 फीसदी लेकर अपात्र को या बगैर दस्तावेज जांचे भुगतान किया जा रहा है। केवल कोटवा प्रखंड में एक हजार से अधिक फर्जी भुगतान किए जाने की बात सामने आ रही है। हरसिद्धि प्रखंड के सिर्फ एक पंचायत मानिकपुर हसुआहा में करीब 400 लोगों को अनुदान मिला है और उनमें फर्जी की संख्या ही ज्यादा बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि करीब 300 आवेदकों के लिए श्रम प्रवर्तन अधिकारी की ओर से भेजी गई सिफारिश को श्रम अधीक्षक ने रद्द कर दिया है। उनमें भी ऐसी ही गड़बड़ी सामने आने की बात कही जा रही है।
(इनपुट-
राजीव रंजन, मोतिहारी)