पेटा इंडिया की ओर से चलाया गया जागरुकता अभियान।
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पटना में पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) इंडिया द्वारा पशुओं के जन्म नियंत्रण को लेकर जागरुकता अभियान चलाया गया। पेटा की ओर से अनुष्का यादव और उत्कर्ष गर्ग ने बताया कि जानवरों के पास संख्या नियंत्रण की न तो कोई समझ होती है और न ही उनके पास कोई साधन होता है। इसलिए सरकारों की यह जिम्मेदारी है कि वे पशु नियंत्रण के लिए सोचें। नगर निगम जैसी संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि वह शहर के श्वानों के बंध्याकरण करें ताकि उनकी संख्या उतनी न बढ़े। पेटा इंडिया से जुड़े समर्थकों ने इस विषय पर जागरूकता के लिए गर्भ निरोधक के इस्तेमाल करने की अपील की और साथ ही लिफलेट भी बांटे।
पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम चलाने का निर्देश
पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया के समर्थकों द्वारा विश्व जनसंख्या दिवस (11 जुलाई) के पहले बुधवार को पटना में प्रदर्शनी लगाई गई। लोगों को पशु जन्म नियंत्रण के संदर्भ में जागरूक किया गया। पेटा इंडिया के कैंपेन्स कोऑर्डिनेटर उत्कर्ष गर्ग ने कहा, "हर साल, लाखों कुत्ते और बिल्लियाँ सड़कों पर पीड़ित होते हैं या पशु आश्रयों में मर जाते हैं क्योंकि उन्हें एक प्यार भरा घर नहीं मिल पाता है। यदि आप अपने परिवार में कुत्ते या बिल्ली का स्वागत करने पर विचार कर रहे हैं, तो इन्हें खरीदने के बजाय किसी बेघर जानवर को गोद लें। केंद्र सरकार ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत राज्यों हेतु पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023 अधिसूचित किया है। इस नियम के अनुसार, नगर पालिका, नगर निगम और पंचायत जैसे संबंधित स्थानीय निकायों को सामुदायिक कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के लिए पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम चलाने का निर्देश दिया गया है।
सड़कों पर जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं ये पशु
पटना और पूरे भारत में, अनगिनत कुत्ते और बिल्लियां सड़कों पर जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इनमें से कई पशुओं को रोज़ भूखमरी का सामना करना पड़ता है, लोगों द्वारा मारा-पीटा जाता है या मौत के घाट उतारा जाता है। इन पशुओं के चलती सड़क पर गाड़ी से चोट लगने का ख़तरा बना रहता है, या यह अन्य तरीकों से दुर्व्यवहार का शिकार होते हैं। इनमें से कई पशुओं को अच्छे घरों की कमी के कारण पशु आश्रयों में भेज दिया जाता है। जब भी कोई व्यक्ति पशु बिक्री दुकानों से या किसी ब्रीडर से कुत्ते या बिल्ली को खरीदता है तो किसी बेघर पशु को उसका घर मिलने का अवसर समाप्त हो जाता है। अग्रणी पशु कल्याण विशेषज्ञों के अनुसार भारत में अनुमानित 70 मिलियन कुत्ते और बिल्लियाँ अपना जीवन सड़कों पर बिता रहे हैं। इस समस्या का सीधा समाधान ABC है। एक मादा कुत्ते की नसबंदी करने से छह साल में 67,000 बच्चों को जन्म लेने से रोका जा सकता है और एक मादा बिल्ली की नसबंदी करने से 4,20,000 बच्चों के जन्म पर रोक लगाई जा सकती है। जिन पशुओं की नसबंदी कराई जाती है वो लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जीते हैं और, मादा पशुओं के मामले में, उनके भटकने, लड़ने या काटने की संभावना कम हो जाती है।