Rambabu Singh : छह महीने पहले शादी हुई थी। सेना में बिहार रेजीमेंट के जवान थे रामबाबू सिंह। उनका शव पटना आया, लेकिन साथ-साथ कई संशय भी। रामबाबू सिंह को 'शहीद' नहीं माना गया, जिसके कारण गार्ड ऑफ ऑनर नहीं दिया गया। पढ़ें पूरी बात।
पहलगाम हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया तो पाकिस्तान से तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितयों के बीच सीवान के रहने वाले जवान रामबाबू सिंह के शहीद होने की जानकारी आई। जानकारी यह भी कि वह सीमा सुरक्षा बल में थे। युद्ध जैसी परिस्थितियों में मौत की वजह साफ नहीं हो रही थी। अब सेना ने बिहार सरकार को बताया है कि रामबाबू सिंह सेना की बिहार रेजीमेंट के जवान थे और उनकी मौत सड़क हादसे में हुई थी, इसलिए उन्हें युद्ध-शहीद का दर्जा नहीं दिया जा रहा है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शहीद के नाम पर जो 50 लाख की अनुग्रह राशि का एलान किया था, अब वह भी बदलने वाला है।
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पहले यह बताया गया था कि शहीद रामबाबू भारत के महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रणाली S-400 डिफेंस सिस्टम की तैनाती पर तैनात थे। नौ मई को वह एस-400 संचालित करते समय गंभीर रूप से घायल हो गए। तीन दिन तक जीवन और मृत्यु से संघर्ष करते हुए अंततः 12 मई को उन्होंने अंतिम सांस ली। इलाज के दौरान ही उन्होंने मातृभूमि पर न्योछावर होते हुए वीरगति प्राप्त की। अब सेना की ओर से बताया गया कि सड़क हादसे में राम बाबू की मौत हो गई। एक वरीय अधिकारी ने बताया कि “हमें सेना से बुधवार रात एक पत्र प्राप्त हुआ, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि रामबाबू सिंह सेना में थे और उनकी मृत्यु सड़क दुर्घटना में हुई, इसलिए उसे ‘संघर्ष में शहीद’ नहीं माना जा सकता।”
तेजस्वी यादव ने दी श्रद्धांजलि
शहीद के पार्थिव शरीर को विशेष विमान से पटना एयरपोर्ट लाया गया, जहां बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद सड़क मार्ग से शव को सीवान के उनके गांव लाया गया। गांव पहुंचने पर शोकाकुल दृश्य देखने को मिला। शहीद की पत्नी, जिनकी शादी महज तीन महीने पहले हुई थी, सदमे में बार-बार बेहोश होती रहीं। बूढ़े माता-पिता की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। उनके परिवार को संभालना मुश्किल हो रहा था।
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सेना के जवानों ने शहीद रामबाबू को अंतिम सलामी दी। पार्थिव शरीर को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। हजारों लोग जनसैलाब बनकर अंतिम यात्रा में शामिल हुए। शहीद के सम्मान में लोगों ने तिरंगा लहराया और पूरे रास्ते शहीद रामबाबू अमर रहें के नारों से आसमान गूंजता रहा।
जानिए, क्या कहा था नीतीश सरकार ने
रामबाबू सिंह के शहीद होने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की थी और कहा था कि उनकी शहादत को देश हमेशा याद रखेगा। मुख्यमंत्री ने वीर सपूत की शहादत पर उनके परिजनों को दुख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद जवान रामबाबू सिंह के निकटतम आश्रित को राज्य सरकार की ओर से 50 लाख रुपये की सम्मान राशि दी जायेगी, साथ ही शहीद जवान रामबाबू सिंह का राज्य सरकार की ओर से पुलिस सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जायेगा।