नक्सलियों के गढ़ के रूप में चर्चित मधुबन उतरी व दक्षिणी पंचायत के अंश भाग को मिलाकर मधुबन नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त हुआ है, जो बड़ी उपलब्धि है। बिहार में एनडीए की सरकार बनने के बाद तेतरिया की सभा में सीएम नीतीश कुमार ने मधुबन, पकड़ीदयाल व मेहसी को नगर पंचायत बनाने की घोषणा की की थी। घोषणा के बाद प्रशासनिक महकमे के द्वारा कार्रवाई शुरू हुई। 2007 में अधिसूचना जारी हो गयी। पकड़ीदयाल व मेहसी नगर पंचायत के रूप में अधिसूचित किया गया, लेकिन मधुबन नगर पंचायत का मामला हाईकोर्ट में जा पहुंचा। हाईकोर्ट के स्टे के बाद से मामला अधर में चल रहा था। हलांकि मधुबन विधायक राणा रणधीर के प्रयास के कारण मधुबन को नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त हुआ है। मधुबन नगर पंचायत में दो राजस्व ग्राम विशुनपुर तारा 32 व मधुबन 85 शामिल किया गया है। 2011 की जनसंख्या के अनुसार इसकी 16391 है, जबकि नगर पंचायत का क्षेत्रफल 552.94 हेक्टेयर है।
दिन दहाड़े मधुबन थाना, अंचल, ब्लाक, बैंकों व तत्कालीन सांसद सीताराम सिंह के आवास पर हुआ था हमला
23 जून 2005 को मधुबन में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी के बाद दूसरी दिनदहाड़े हमला बोला था। करीब 200 से 300 की संख्या में आये नक्सलियों की टोली ने मधुबन थाना, अंचल, ब्लाक, बैंकों व तत्कालीन शिवहर सांसद सीताराम सिंह के आवास पर हमला कर दिया था। हमले में स्टेट बैंक के गार्ड रूपनारायण सिंह, थाने के सिपाही नासिर हुसैन नक्सलियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गये थे। बैंको से लाखों रूपये की लूट के साथ ही थाने व अंचल से हथियार लूट लिए गये। नक्सलियों के लौटने के क्रम में सीआरपीएफ से मुठभेड़ में नक्सलियों को काफी क्षति हुई थी। मुठभेड़ में सीआरपीएफ के जवान भी शहीद हुए थे।
नगर पंचायत बनने से खुलेगा विकास द्वार
लंबी प्रतीक्षा के बाद मधुबन को नगर पंचायत की अधिसूचना जारी होने के बाद मधुबन में विकास की रफ्तार तेज होगी। बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास होगा .नई कम्पनियां मधुबन की तरफ रूख करेगी, जिससे रोजगार के नये अवसर खुलेंगे।