सुशील मोदी हमेशा नीतीश कुमार के सबसे पसंदीदा डिप्टी रहे।
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भाजपा का साथ तो सुशील मोदी ही वित्त मंत्री
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2005 में बिहार की सत्ता संभाली थी। तब से 2020 के चुनाव तक, उनका ज्यादा समय भाजपा के साथ ही बीता। भाजपा में उनके 'उप' की जिम्मेदारी भी तय थी- सुशील कुमार मोदी। छात्र जीवन से सुशील कुमार मोदी उनके आसपास रहे थे और भाजपा सरकार में नीतीश की पसंद के तहत उन्हें हमेशा उप मुख्यमंत्री का दर्जा मिलता रहा था। 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद अचानक भाजपा ने सुशील मोदी को किनारे लगाया और पहली बार नीतीश सरकार में भाजपा से किसी नए चेहरे को वित्त विभाग की जिम्मेदारी मिली- तार किशोर प्रसाद। जब सुशील मोदी किनारे हुए थे, तभी से माना जा रहा था कि भाजपा नीतीश कुमार को लेकर कुछ-न-कुछ खेल कर रही है। उन्हीं बातों को तब बल मिला, जब 2020 में चुनी सरकार चला रहे नीतीश कुमार ने अचानक महागठबंधन का सीएम बनना पसंद किया। पिछली बार जब ऐसा हुआ था, तब सुशील मोदी ही उन्हें महागठबंधन छोड़ भाजपा से जोड़ने वाले चेहरे थे। अगस्त 2022 में जब नीतीश कुमार महागठबंधन की ओर गए तो सुशील मोदी बहुत हद तक किनारे पड़ चुके थे। अब तो वह दुनिया में भी नहीं।
सुमो हटे तो तार किशोर, फिर विजय और अब सम्राट
सुशील मोदी की जगह 2020 में वित्त मंत्री बने तार किशोर प्रसाद 2021-22 और 2022-23 का बजट पेश कर सके थे। महागठबंधन की सरकार में नीतीश ने वित्त विभाग अपनी पार्टी जनता दल यूनाईटेड के खाते में रखा और मंत्री बनाए गए- विजय कुमार चौधरी। चौधरी अगस्त 2022 से जनवरी 2024 तक वित्त मंत्री रहे और वह सिर्फ एक बार वित्तीय वर्ष 2023-24 का बजट पेश कर सके। जनवरी 2024 में फिर एक बार परिस्थितियां बदलीं और राजद की जगह भाजपा के साथ आए नीतीश कुमार ने वित्त विभाग की जिम्मेदारी भाजपा के पास छोड़ने का फैसला लिया। इस बार उस समय बिहार प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष रहे सम्राट चौधरी को उप मुख्यमंत्री बनाया गया और वित्त विभाग की जिम्मेदारी उनके पास आ गई। यह वित्त मंत्री सम्राट चौधरी का दूसरा बजट है। इससे पहले उन्होंने वित्तीय वर्ष 2024-25 का बजट पेश किया था और अब 2025-26 का बजट लेकर आ रहे हैं।