बिहार के एक युवक ने कमाल कर दिया। उसके इस कमाल पर पूरा का पूरा गांव उसपर गर्व कर रहा है। वह युवक सारण जिला मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर दूर नगर पंचायत परसा बाजार के वार्ड संख्या- 12 के सैदपुर मोहल्ला निवासी शंभू प्रसाद और रेखा देवी के पुत्र सन्नी कुमार (25) हैं, जो वैज्ञानिक सहायक (बी) पर चयनित हुए हैं।
सन्नी को विकट परिस्थितियों ने झकझोर कर रख दिया था, लेकिन सपनों पर पानी फिरने नही दिया
विकलांग पिता और रसोइया के रूप में काम करने वाली मां के सपने को पूरा करना कितना कठिन होता है। यह उस सन्नी से ज्यादा कोई और नही जानता होगा, जिसने कठिन परिश्रम के बदौलत इस पद पर अपनी काबिलियत से कब्जा जमाया है। क्योंकि सन्नी को अपना परिवार और देश के लिए कुछ कर गुजरने की तमन्ना संजो कर पढ़ाई करता रहा। हालांकि सन्नी और उसके परिवार के अन्य सदस्यों को रहने के लिए छत तक नसीब नही था। साथ ही पिता का पैर टूट जाने से विकलांग की ज़िंदगी व्यतीत करने वाले पिता के कारण सन्नी को विकट परिस्थितियों ने झकझोर कर रख दिया था। जिस कारण सपनों पर पानी फिरने की उम्मीद हो गई थी। क्योकि पिता हमेशा से सफल होते हुए सन्नी का सपना पूरा करते हुए देखना चाहते थे।
सन्नी के सपने को पूरा करने रसोइया का करना पड़ा था काम
रेखा देवी कहती है कि सन्नी के पिता का पैर टूटने पर पुत्र को पढ़ाने और सपने को पूरा करने के लिए प्रेरित करते हुए हौसला बढ़ाती रही। उस हौसले को बुलंद रखते हुए सन्नी ने फिर से पढ़ाई शुरू किया। पुत्र की पढ़ाई, पति का इलाज़ और उनकी सेवा करने के साथ ही बच्चों का लालन पालन और पोषण के लिए विद्यालय में रसोइया का काम शुरू किया। मात्र 25 रुपए दैनिक मजदूरी पर काम किया। बड़े बेटे को दुकान पर मजदूरी कराया, सन्नी के सपनो को पूरा करने के लिए मैं और मेरा बड़ा बेटा दिन रात मेहनत मजदूरी कर उसकी पढ़ाई को पूरा कराने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। परिवार की माली हालत देख सन्नी ने कोचिंग की फी देने के लिए परसा बाजार पर बिस्कुट एजेंसी में पलदारी का भी काम किया है। पलदारी करने के बाद शेष बचे समय में अपनी पढ़ाई करता रहा।
परिवार का दुर्दिन को याद कर सपना पूरा करने के लिए अडिग रहा सन्नी
सन्नी के बड़े भैया मिथलेश कुमार का कहना है कि प्रथम श्रेणी से मैट्रिक की परीक्षा पास करने के बाद छपरा शहर से सटे पश्चिम पीएन सिंह डिग्री कॉलेज से विज्ञान संकाय से इंटर की पढ़ाई के दौरान ही पॉलिटेक्निक जैसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने लगा था। हालांकि पॉलिटेक्निक में चयन होने पर सन्नी को थोड़ी सी राहत मिली। पॉलिटेक्निक की पढ़ाई कर सफलता हासिल हाथ लगी। तो वर्ष 2021 में उसका प्रशिक्षण दरियापुर प्रखंड के बेला स्थित रेल पहिया कारखाना में शुरू हुआ। हालांकि आगे की पढ़ाई जारी रखा। वर्ष 2022 में गुजरात के गांधी नगर स्थित इंस्च्यूट ऑफ प्लाज्मा रिसर्च सेंटर में प्रोजेक्ट साइंटिफिक में सहायक के पद चयन हो गया। हालांकि रिसर्च सेंटर में कार्य करते हुए सन्नी ने सपने को पूरा करने के लिए अपना संघर्ष जारी रखा। माता, पिता और भाई के दुर्दिन का वह कठिन दौर को देख सपने को पूरा करने के लिए अपना पढ़ाई जारी रख लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ता रहा। आज उसी का नतीजा देशवासियों के सामने दिख रहा है। क्योंकि सन्नी की कठिन मेहनत और लग्न ने वर्ष 2024 में देश का इकलौता पद के लिए चयन हुआ है।
मम्मी, पापा और भैया का बस एक ही सपना था
सन्नी ने बताया कि वर्ष 2024 में भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग की स्वायत्त संस्था समविश्विद्यालय होमी भाभा रोड मुंबई में संचालित टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान में सहायक वैज्ञानिक (बी) एकल पद पर सफलता हासिल किया है। एक मात्र इस पद के लिए पूरे देश से 38 अभ्यर्थियों ने भाग लिया था। जिसमें मेरा चयन हुआ है। सन्नी ने कहा कि वैज्ञानिक बन देश की सेवा करने का सपना था। जो आज पूरा होते देख रहा हूं। हालांकि हमसे ज्यादा खुशी मेरे माता और पिता जी को होनी चाहिए। क्योंकि उस समय जिल्लत की ज़िंदगी कट रहा था। साथ ही विकट परिस्थितियों से मेरा पूरा परिवार जूझ रहा था। उन दिनों मेरे पिता जी पूरी तरह से दिव्यांग हो गए थे। लेकिन उस विकट परिस्थितियों में मेरी मां विद्यालय में मजदूरी के रूप में रसोइया का काम कर रही थी। वहीं मेरे बड़े भैया मिथलेश नाबालिग स्थिति में मोटर गैरेज में मजदूरी कर हमारा हौसला बढ़ाने के साथ साथ आगे बढ़ने के लिए हिम्मत भी देता था। कोचिंग में पढ़ाई करने के लिए मेरे पास ट्यूशन फी तक का पैसा नही था तो उसकी भरपाई करने के लिए खुद पलदारी भी कर चुका हूं। क्योंकि इसके अलावा कोई चारा नहीं था।
बेटे की सफलता पर मां के आंखों में खुशी के आंसू से छलका दर्द
पति के दिव्यांग होने पर खुद रसोइया का क़ाम करने वाली मां के दिल को उस समय खुशी का ठिकाना नही होगा। जब अपने बेटे सन्नी के काबिलियत से गांव ही नही बल्कि राज्य के अलावा देश और विदेशों में उसकी पहचान बन गई है। क्योंकि बेटे सन्नी की पढ़ाई के साथ- साथ परिवार का पालन पोषण भी करती थी। हालांकि बड़ा बेटा कभी मोटर गैरेज तो कभी कपड़ा दुकान पर मजदूरी कर परिवार को सहयोग करता था। सबसे अहम बात यह है कि सन्नी खुद पलदारी किया है। सभी की संघर्ष पर सन्नी खड़ा उतरते हुए वैज्ञानिक बनने की दिशा में अग्रसर बढ़ रहा है। माता जीवन की कठिन समय को याद कर भावुक होकर फफक- फफक कर रोने लगी।