अस्पताल में इलाजरत मां उसकी बेटी।
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
कौन सा भोजन बन गया था जहर
बच्चे की मामा अब्दूल करीम का कहना है कि रविवार की रात लाफा का साग, चावल, आलू की सब्जी और अंडा खाया था। खाना खाने के बाद सभी ने अलाव लगाकर आग भी सेंका था। उसके बाद सभी लोग अपने-अपने बिस्तर पर सोने के लिए चले गये। कुछ देर बाद मां और उनकी बेटियों को उल्टी होने लगी। परिवार के सभी लोगों की तबियत बिगड़ गई। स्थिति यह हो गई थी कि घर में कोई ऐसा नहीं था जो किसी को बुला सकर या फिर दवा ला सके। कुछ ही देर में मां और उनके सभी बच्चे बेहोश हो गए। सुबह जब बच्चे की मां हाजरा खातुन को होश आया तो उसने अपने मायके वालों को फोन पर घटना की सूचना दी। सूचना मिलते ही मायके के लोग और फिर आसपास के लोग वहां पहुंचे तो वहां सभी बेहोश पड़े थे। यह देख सभी के होश ही उड़ गए। परिजनो ने सभी को जलालगढ़ अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उनकी बेटी जुबेरा को मृत घोषित कर दिया। हाजरा खातुन और उनकी तीन बेटियों का इलाज अभी जीएमसीएच में चल रहा है।
बेटे की चाहत में चार बेटियां हो गई
परिजनों का कहना है कि बेटे की चाहत में चार बेटियां हो गई। लेकिन बच्चे के पिता और मां बेटियो से काफी खुश है और उन्हें पढ़ा कर आगे बढ़ाना चाहते है। उन्होंने बताया कि बच्चों के पिता इब्राहित किशनगंज में प्राइवेट नौकरी करते हैं। जलालगढ़ में किराए के मकान में रहकर बच्चे प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हैं। करीम ने बताया कि उनकी सबसे बड़ी बेटी मारिया खातुन वर्ग चार में पढ़ती है। जुबेरा खातुन, जिसकी मौत हो गई, वह कक्षा 3 में पढ़ती थी। वहीं हमीरा खातुन वर्ग एक में पढ़ती है।