एक पक्ष के आरोपी सुभाष पोद्दार के साथ पहुंची पुलिस
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अब वजह के लिए दो अलग-अलग कहानी भी जानिए
मंगलवार को पीड़िता ने पुलिस महानिदेशक विनय कुमार से सुल्तानगंज थाना के पुलिस निरीक्षक सह थानाध्यक्ष विवेक कुमार जायसवाल के खिलाफ शिकायत करते हुए न्याय की गुहार लगायी थी। पीड़िता ने आरोप लगाते हुए कहा कि कांड संख्या 210/21 के तहत रात करीब 12 बजे सुल्तानगंज थाना के थानाध्यक्ष विवेक कुमार जायसवाल विपक्षी पार्टी सुभाष पोद्दार के साथ आर्थिक लाभ लेकर विपक्षी पार्टी को राहत पहुंचाया। सुभाष पोद्दार के साथ थानाध्यक्ष पीड़िता के घर पर आये और दरवाजा खोलने के लिए कहा, लेकिन जब तक घर वाले दरवाजा खोलते उससे पहले विवेक जायसवाल ने एक सिपाही को सहारा देते हुए दीवार फंदा दिया। पुलिस के अंदर कूदने से पहले ही पीड़ित मुकेश राय की पत्नी ने गेट खोल दिया। अब तक की सारी गतिविधि सीसीटीवी में कैद हो गया। पीड़िता ने यह भी बताया कि उसके साथ 18 सितंबर 2021 को आगजनी की गई थी, जिसमें मुकेश राय की दो बेटियां झुलस गई थी। पीड़िता का यह भी कहना है कि इस मामले में मुख्य रूप से सुभाष पोद्दार, आलोक शर्मा, उत्तम चौधरी, गुड्डू शर्मा, संगीता देवी और अनीता देवी को आरोपी बनाया था, लेकिन बाद में अनुसंधान पदाधिकारी ने उन नामों से सुभाष पोद्दार और उत्तम चौधरी के नाम को को हटा दिया था। पीड़िता ने इस बात पर आपत्ति जाहिर करते हुए डीजीपी विनय कुमार से मिलकर उनको साउंड क्लिप सुनाते हुए कुछ फुटेज भी दिखाया। इस सब को देखने के बाद डीजीपी विनय कुमार ने सभी साक्ष्यों को जमा करने और इस पूरे मामले की एक बार फिर से जांच कराने का आश्वासन पीड़िता को दिया है।
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पुलिसकर्मी से घर का दीवार फंदवाते थानेदार
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पीड़ित के घर धमकी देने पहुंचे अनुसंधानकर्ता नीरज कुमार
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यहां है दिलखुश का प्रमाण।
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इस मामले में भी हुई थी पुलिस की किरकिरी
एक दूसरी कहानी भी है, जिसमें सुल्तानगंज थानाध्यक्ष विवेक जायसवाल ने न सिर्फ वर्दी की हनक दिखाई बल्कि वरीय अधिकारियों को भी गुमराह किया था। मामला दिलखुश यादव का था, जिसमें 9 मार्च 2025 को इसी सुल्तानगंज के थानेदार विवेक जायसवाल के द्वारा एक संगीन मामले में दिलखुश यादव (20) की गिरफ्तारी की थी। थानेदार ने उसके साथ थर्ड डिग्री का इस्तेमाल करने के लिए अपने थाना क्षेत्र में नहीं बल्कि अपने पूर्व के थाना सबौर का इस्तेमाल किया और पूरी रात उसकी जमकर पिटाई की। इस दौरान पुलिस को लगा कि अब वह मर जाएगा, तो उसे उठाकर मायागंज अस्पताल में सुबह के 2:30 बजे डॉ बी के जयसवाल के यूनिट में भर्ती करा दिया। इस दौरान पीड़ित परिजन लगातार सुल्तानगंज थाना के चक्कर काटते रहे। पिटाई के दौरान अर्द्ध मूर्छित दिलखुश की गंभीर हालत को देख सुबह के करीब 4 : 00 बजे पुलिस की हालत भी बिगड़ने लगी। तब आननफानन में विवेक जायसवाल ने अपने मातहतों को कहा कि दिलखुश को उठाकर किसी निजी नर्सिंग होम में दाखिला करवाओ, अगर यह मर गया तो हमलोग फंस जाएंगे। फिर पुलिस ने दिलखुश को वहां से उठाया और गायब कर दिया। सुबह में हंगामा मच गया कि इलाजरत बंदी पुलिस की हिरासत में इलाज कराते हुए दिलखुश फरार हो गया। हालाँकि मामला फरार होने का नहीं बल्कि यह थानाध्यक्ष विवेक जायसवाल के द्वारा नाटकीय साजिश का एक हिस्सा था। इस बात की जानकारी रेंज के आईजी विवेक कुमार तक भी पहुंची। उन्होंने थानेदार के इस साजिश को भांप लिया और तल्ख़ लहजे में 24 घंटे के अंदर गिरफ्तार करने का आदेश जारी किया। साथ ही यह भी कहा कि अगर गिरफ्तारी नहीं हुई तो थाना के उस टीम के तमाम पुलिसकर्मी निलंबित किये जाएंगे। पुलिस ने भी अपनी बहादुरी दिखाते हुए नवगछिया के रेफरल अस्पताल में छिपकर इलाजरत दिलखुश की गिरफ्तारी दिखाई। इस पूरे पुलिसिया करतूत का पूरा साक्ष्य मायागंज अस्पताल के सीसीटीवी में दर्ज हो गया।
सुल्तानगंज थाना के पुलिस निरीक्षक सह थानाध्यक्ष विवेक कुमार जायसवाल।
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अब यह है सवाल
अब बड़ा सवाल है कि ऐसे पुलिसकर्मियों के पास फरियादी अपनी गुहार लेकर जाए तो जाए कैसे। जिन्हें रेंज के वरीय अधिकारी सम्मानित करते हों उनका पाप कोई बताये तो बताये कैसे? अगर आज पुलिस मुख्यालय तक लोग न पहुंच पाए तो उन्हें न्याय मिले तो मिले कैसे? बहरहाल पुलिस महानिदेशक पटना द्वारा मामले में संज्ञान लेने के बाद थानेदार को लाइन क्लोज किया गया, जिसकी चर्चा भागलपुर में जमकर हो रही है।