पटना में रहने वाले रंगकर्मियों के लिए एक अच्छी खबर है। प्रसिद्ध लेखक श्रीलाल शुक्ल के जन्मशती वर्ष के उपलक्ष्य में श्रीलाल शुक्ल के प्रसिद्ध उपन्यास पर आधारित राग दरबारी का मंचन होने वाला है। इस प्रस्तुति का नाट्य रूपांतरण, परिकल्पना और निर्देशन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से प्रशिक्षित और देश के जाने माने रंगकर्मी पुंज प्रकाश ने किया है। इस बात की जानकारी हाउस ऑफ वेराइटी के सुमन सिन्हा और दस्तक के पुंज प्रकाश ने दी।
क्या है राग दरबारी में
राग दरबारी प्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार श्रीलाल शुक्ल की प्रसिद्ध अपनेआप में एक अनूठी व्यंग्य रचना है जिसके लिये उन्हें सन् 1969 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह ऐसा उपन्यास है जो गाँव की कथा के माध्यम से आधुनिक भारतीय जीवन की मूल्यहीनता को सहजता और निर्ममता से अनावृत करता है। शुरू से अन्त तक इतने निस्संग और सोद्देश्य व्यंग्य के साथ लिखा गया हिंदी का शायद यह पहला वृहत् उपन्यास है। राग दरबारी उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल के एक कस्बानुमा गाँव शिवपाल गंज की कहानी है; उस गाँव की जिन्दगी का दस्तावेज, जो स्वतन्त्रता-प्राप्ति के बाद ग्राम विकास और ‘गरीबी हटाओ’ के आकर्षक नारों के बावजूद घिसट रही है। राग दरबारी की कथा भूमि एक बड़े नगर से कुछ दूर बसे गाँव शिवपालगंज की है जहाँ की जिन्दगी प्रगति और विकास के समस्त नारों के बावजूद, निहित स्वार्थों और अनेक अवांछनीय तत्वों के आघातों के सामने घिसट रही है। शिवपालगंज की पंचायत, कॉलेज की प्रबन्ध समिति और कोआपरेटिव सोसाइटी के सूत्रधार वैद्यजी साक्षात वह राजनीतिक संस्कृति है जो प्रजातन्त्र और लोकहित के नाम पर हमारे चारों ओर फल फूल रही है।
कैसे और कहाँ देखें नाटक
6 जुलाई 2025 को ऑफ़ वेराइटी, पटना में संध्या 6.45 बजे इस नाटक का प्रथम प्रदर्शन होगा, उसके बाद हर वीकेंड अर्थात दिनांक 12, 13, 19, 20, 26 और 27 जुलाई 2025 को रोजाना संध्या 6.45 बजे से इस नाटक का मंचन देखा जा सकता है। इस नाटक के टिकट बुक माई शो और हाउस ऑफ वेराइटी पटना के टिकट काउंटर पर उपलब्ध हैं और टिकट का दर 100 रु प्रति टिकट है। शहर के दो दर्जन युवा अभिनेताओं के अभिनय से सुसज्जित दस्तक पटना की इस भव्य प्रस्तुति की प्रकाश परिकल्पना विदुषी रत्नम तथा गति संचालन प्रिंस सूर्यवंशी ने किया है।
इस नाटक में इनका है किरदार
इस नाटक में अभिनय कर रहे अभिनेताओं में स्ट्रीट सिंगर्स के किरदार में विदुषी रत्नम होंगे। इसके अलावे स्ट्रीट सिंगर्स, बेला के किरदार में श्रृष्टि और रश्मि रानी होंगी। ट्रक ड्राईवर, प्रिंसिपल के किरदार में पवन कुमार होंगें। ट्रक क्लीनर, चपरासी के रूप में सन्नी कुमार किरदार करेंगे। रंगनाथ के रूप में मोहित कुमार किरदार करेंगे। रुप्पन, छात्र के रूप में ईशान कश्यप होंगे। अफ़सर, छात्र, मलेरिया इंस्पेक्टर, रामाधीन भीखमखेड़वी, दलाल, मज़दूर, हकीम, कोरस का किरदार मो इरशाद आलम निभाएंगे। पुलिस चपरासी, छात्र और भतीजा का किरदार गोलू निभाएंगे। मोतीराम मास्टर, गयादीन और लठैत का किरदार रविराज करेंगे। गयादीन का किरदार गुलशन करेंगे। खन्ना मास्टर के किरदार को रियान अहसन जीवंत करेंगे। मालवीय मास्टर का किरदार ओम प्रकाश निभाएंगे। वैद्यजी राहुल कुमार बनेंगे। लंगड़,बच्चा, चोर और मजदूर का किरदार अमन कुमार करेंगे। बद्री बनेंगे चितरंजन गोंड। भगौती, जोगनाथ और छात्र का किरदार दौलत कुमार करेंगे। छोटे पहलवान, छात्र और मजदूर का किरदार प्रिंस सूर्यवंशी निभाएंगे। छात्र, सनीचर का किरदार लक्ष्मीकांत करेंगे। छात्र, सिपाही और मालवीय का किरदार विकास करेंगे। लड़का, पुलिस और मजदूर का किरदार रोहित करेंगे। छात्र और सिपाही के किरदार में शिवम् होंगे। पुलिस, छात्र, सिपाही, चोर, अंधा और मजदूर का किरदार प्रभात सिंह निभाएंगे। छात्र, मजदूर, चोर और कोरस का किरदार राजवीर करेंगे। छात्र, मजदूर, चोर और कोरस के रूप में साहिल होंगे और लवदीप यादव कोरस करेंगे।
क्या है दस्तक
दस्तक की स्थापना सन 2 दिसम्बर 2002 को पटना में हुई। तब से अब तक मेरे सपने वापस करो (संजय कुंदन की कहानी), गुजरात (गुजरात दंगे पर विभिन्न कवियों की कविताओं पर आधारित नाटक), करप्शन जिंदाबाद, हाय सपना रे (मेगुअल द सर्वानते के विश्वप्रसिद्ध उपन्यास Don Quixote पर आधारित), राम सजीवन की प्रेम कथा, पॉल गोमरा का स्कूटर (उदय प्रकाश की कहानी), एक लड़की पांच दीवाने (रचनाकार - हरिशंकर परसाई), फंदी, एक और दुर्घटना (नाटककार - दरियो फ़ो), पटकथा (कवि - धूमिल), भूख, किराएदार (दोस्त्रोयोव्सकी की कहानी रजत रातें पर आधारित), एक था गधा (नाटककार - शरद जोशी), आषाढ़ का एक दिन (नाटककार - मोहन राकेश), जामुन का पेड़ (कथाकार – कृशन चंदर), पलायन, तीसरी क़सम उर्फ़ मारे गए गुलफ़ाम (कहानी – फनीश्वरनाथ रेणु), निठल्ले की डायरी (व्यंग्य – हरिशंकर परसाई), पंचलाईट (कहानी – फनीश्वरनाथ रेणु), चांद तन्हा आसमां तन्हा आदि नाटकों का मंचन देश के अलग-अलग शहरों, गांव, कस्बों के आयोजित प्रमुख नाट्योत्सवों में किया गया है। दस्तक का उद्देश्य नाटकों के मंचन के साथ ही साथ कलाकारों के शारीरिक, ज्ञानात्मक, संवेदनात्मक व कलात्मक स्तर को परिष्कृत और प्रशिक्षित करना और नाट्य-प्रेमियों के समक्ष समसामयिक, प्रायोगिक और सार्थक रचनाओं की नाट्य प्रस्तुतियों और आयोजनों को उपस्थित करना है।
जानिये राग दरबारी के बारे में
राग दरबारी, सन 1967 में हिंदी में प्रकाशित एक उपन्यास है, जो प्रसिद्ध लेखक श्रीलाल शुक्ल की एक प्रसिद्ध व्यंग्य रचना है। यह एक ऐसा उपन्यास है जो स्वतंत्रता के बाद के एक गांव की कहानी को हास्य और व्यंग्य के माध्यम से बताता है और आधुनिक भारतीय जीवन की व्यर्थता को सहजता और निर्ममता से उजागर करता है। यह हिंदी का पहला प्रमुख उपन्यास है और अपने आप में बिल्कुल अनूठा है, जिसमें व्यंग्य और कटाक्ष को उद्देश्यपूर्ण ढंग से आत्मसात किया गया है। इस नाटक का आधार यही राग दरबारी है जो महज एक व्यंग्य कथा नहीं है, बल्कि इसमें श्रीलाल शुक्ल ने आजादी के बाद के भारत के ग्रामीण जीवन की मूल्यहीनता को परत-दर-परत उकेरा है। इसकी कथावस्तु बड़े शहर से थोड़ी दूर बसे शिवपालगंज नामक गांव में स्थापित है, जहां प्रगति और विकास के तमाम नारों के बावजूद जीवन निहित स्वार्थों और अनेक अवांछनीय तत्वों के हमलों के सामने घिसट रहा है और लोकतंत्र और लोक कल्याण के नाम पर हमारे इर्द-गिर्द पनप रही राजनीतिक संस्कृति का आईना पेश करता है। यह नाटक इसी उपन्यास का महाकाव्यात्मक नाट्य रूपान्तरण है, जिसे पटना (बिहार) की प्रसिद्ध नाट्य मंडली दस्तक द्वारा पुंज प्रकाश की परिकल्पना और निर्देशन में प्रस्तुत किया जाएगा।
जानिये कौन हैं निर्देशक
इस नाटक के निर्देशक पुंज प्रकाश हैं। वहसन 1994 से रंगमंच के क्षेत्र में लगातार सक्रिय अभिनेता, निर्देशक, लेखक, अभिनय प्रशिक्षक व प्रकाश परिकल्पक के रूप में कार्य कर रहे हैं। मगध विश्वविद्यालय से इतिहास विषय में उन्होंने स्नातक किया है। वह नाट्यदल दस्तक के संस्थापक सदस्य भी हैं। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली के सत्र 2004 – 07 में अभिनय विषय में उन्हें विशेषज्ञता मिली। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल में सन 2007-12 तक बतौर अभिनेता के रूप में उन्होंने कार्य किया है। अब तक देश के कई प्रतिष्ठित अभिनेताओं, रंगकर्मियों के साथ उन्होंने कार्य किया है। एक और दुर्घटना, मरणोपरांत, एक था गधा, अंधेर नगरी, ये आदमी ये चूहे, मेरे सपने वापस करो, गुजरात, हाय सपना रे, लीला नंदलाल की, राम सजीवन की प्रेमकथा, पॉल गोमरा का स्कूटर, चरणदास चोर, जो रात हमने गुजारी मरके, पटकथा, भूख, किराएदार, एक था गधा, आषाढ़ का एक दिन, पलायन, मारे गए गुलफ़ाम और तीसरी क़सम, निठल्ले की डायरी, चांद तन्हा आसमां तन्हा आदि नाट्य प्रस्तुतियों का निर्देशन तथा कई नाटकों की प्रकाश परिकल्पना, रूप सज्जा एवं संगीत निर्देशन किया है। कृशन चंदर के उपन्यास दादर पुल के बच्चे, महाश्वेता देवी का उपन्यास बनिया बहू, फणीश्वरनाथ रेणु का उपन्यास परती-परिकथा एवं कहानी तीसरी कसम व रसप्रिया पर आधारित नाटक मारे गए गुलफ़ाम उर्फ़ तीसरी क़सम, भिखारी ठाकुर के जीवन व रचनाकर्म पर आधारित नाटक नटमेठिया, हरिशंकर परसाई की रचना पर आधारित निठल्ले की डायरी सहित मौलिक नाटक भूख और विंडो उर्फ़ खिड़की जो बंद रहती है, पलायन, चांद तन्हा आसमां तन्हा का लेखन भी किया है। देश के विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में रंगमंच, फिल्म व अन्य सामाजिक विषयों पर लेखों के प्रकाशन के साथ ही साथ उनकी कई कहानियों और कविताओं का लेखन व प्रकाशन है। राग दरबारी, एक ऐसी रचना है जो साहित्य प्रेमियों और हिंदी साहित्य अपने आप में कल्ट का दर्ज़ा प्राप्त कर चूका है। ऐसे पाठकों की कोई कमी नहीं जो इस पुस्तक को कभी भी और कहीं से भी उठाकर पढ़ना शुरू कर देते हैं और आनंदित होते हैं। ऐसे उपन्यास पर नाटक तैयार करने के ख़याल मात्र से ही रूह का कांप जाना स्वाभाविक है। फिर ज्ञात हुआ कि श्रीलाल शुक्ल का जन्म शताब्दी वर्ष चल रहा है, तो एक रंगकर्मी और साहित्य प्रेमी होने के नाते उनकी कृति पर नाटक तैयार करके प्रदर्शित करने से बेहतर श्रद्धांजलि मुझे और कुछ समझ में नहीं आया तो एक बार पुनः इनकी सारी कृतियों को पढ़ना शुरू किया लेकिन राग दरबारी के आगे ना कुछ पसंद आना था, न आया। अब चुनौती थी नाट्य-रूपांतरण की। पहले से व्याप्त कई सारे नाट्य-रूपांतरण भी पढ़ा किन्तु वो भी पसंद न आया, तो तय हुआ कि ख़ुद ही रूपांतरण किया जाए।
परदे के पीछे इनकी है महत्वपूर्ण भूमिका
उपन्यासकार श्रीलाल शुक्ल हैं, जबकि इसका प्रचार-प्रसार मो इरशाद आलम ने किया है। गति संचालन प्रिंस सूर्यवंशी का है, जबकि प्रबंधन रवि कुमार ने की है। तकनीकी सहयोग राम बाबू मिश्रा और पप्पू ने किया है। प्रकाश परिकल्पना और संचालन विदुषी रत्नम का है। इसके अलावे मोहित, राहुल, ईशान और अमन का विशेष सहयोग किया है। उद्घोषक के रूप में विनीत कुमार हैं, जबकि
नियंत्रण सुमन सिन्हा का है। नाट्य-रूपांतरण, परिकल्पना और निर्देशन पुंज प्रकाश ने किया है।