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Sharda Sinha: बिहार कोकिला के निधन पर मायके वाले बोले- छठी मैया ने अपनी बेटी को बुला लिया, गांव में शोक की लहर

Wed, 06 Nov 2024 02:06 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सुपौल/ बेगूसराय

सार

Bihar News: लोकगायिका शारदा सिन्हा के निधन से उनके पैतृत गांव में शोक की लहर है। मायके में छठ महापर्व नहीं मनाया जाएगा। मायके वालों ने कहा कि छठ मैय्या ने अपनी बेटी को बुला लिया है।  
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बिहार कोकिला के निधन पर उनके मायके में शोक की लहर है। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रसिद्ध लोक गायिका सुपौल की बेटी शारदा सिन्हा के निधन पर उनके पैतृक गांव हुलास में माहौल गमगीन है। शारदा सिन्हा के छोटे भाई डॉ पद्मनाभ शर्मा ने बताया कि बीती रात करीब 10 बजे जानकारी मिली कि उनकी बहन शारदा सिन्हा का देहावसान हो गया है। बताया कि अधिक रात होने की वजह से वह लोग रात में नहीं जा सके। बुधवार की सुबह वे लोग पटना के लिए  निकले। गांव में शोक की लहर है। मायके में छठ महापर्व नहीं हो पाएगा। मायके वालों ने कहा कि छठ मैय्या ने अपनी बेटी को बुला लिया है।  

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पटना में अंतिम संस्कार की अंतिम इच्छा थी
पटना निकले के दौरान शारदा सिन्हा के छोटे भाई और भाई डॉ. पद्मनाभ शर्मा की पत्नी सुमन शर्मा ने बताया कि दीदी की आखिरी इच्छा थी कि जहां उनके पति का अंतिम संस्कार जहां किया गया था, वहीं उनका भी अंतिम संस्कार हो। बता दें लोक गायिका शारदा सिन्हा के पति का अंतिम संस्कार पटना में किया गया था। शारदा सिन्हा की पार्थिव शरीर को आज दिल्ली से पटना लाया गया है। कल अंतिम संस्कार किया जाएगा।

भाई को राखी बांधना कभी नहीं भुलीं
डॉ. पद्मनाभ शर्मा उन्होंने बताया कि अंतिम बार दीदी 31 मार्च को उनके लड़के की शादी में हुलास आई थी, जहां से वह अगले दिन ही पटना के लिए निकल गई। लेकिन, पटना निकलने से पहले उन्होंने इच्छा जताई थी कि जल्द ही फिर यहां आकर कुछ दिन रुकेंगी। लेकिन किसको पता था कि मंगलवार की रात्रि उनकी आखिरी रात होगी। भाई बताते हैं कि शारदा सिन्हा के बचपन की पढ़ाई हुलास में ही हुई। प्रारंभिक पढ़ाई के बाद वह पहले पटना और फिर राजस्थान चली गईं। गायिकी में प्रसिद्धि प्राप्त करने के बाद भी वह रक्षाबंधन पर भाई को राखी बांधना कभी नहीं भुलीं। अगर कभी पहुंच नहीं पाई तो डाक से रखी पहुंचती थी। अब उनके निधन की खबर से पूरा परिवार सदमे में है। जिस शारदा सिन्हा के गीतों से छठ घाट गूंजते थे, आज उनके निधन से परिवार सहित पूरे गांव में गम का माहौल है।

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स्व. शारदा सिन्हा के ससुराल में शोक की लहर है। - फोटो : अमर उजाला
ससुराल में भी शोक की लहर
इधर, बेगूसराय जिला स्थित सीहमा गांव में बिहार कोकिला शारदा सिन्हा में भी शोक की लहर है। इस गांव में उनका ससुराल है। ससुराल वालों ने कहा कि उनकी बहू बिहार ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने गीत के माध्यम से लोगों के बीच मौजूद रहेंगी। उनकी कमी गांव ही नहीं पूरे बिहार को खल रही है। लोग उन्हें छठी मैया की बेटी के रूप में भी संबोधित करते थे। लोगों ने बताया कि शारदा सिन्हा का अपने ससुराल से काफी लगाव था और वह प्रत्येक वर्ष अपने ससुराल सीहमा आती थीं। यहां के लोगों की काफी मदद भी करती थीं। आज उनकी कमी खल रही है तथा उनकी कमी कभी पूरी भी नहीं हो सकती। लेकिन अपने स्वर के माध्यम से वह लोगों के बीच सदैव जीवंत रहेगी। 
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