Bettiah News : कागजात के मिलान में कर्मवीर सिंह का फोटो, मेडिकल रिपोर्ट, आधार कार्ड, ऑनलाइन डाटा वेरिफिकेशन, आर्थिक प्रमाण पत्र का मिलान करने पर गलत निकला।
बेतिया में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सड़क हादसे में मृत चचेरे भाई के नाम पर खुद ही एक युवक एसएसबी में योगदान करने पहुंच गया था। जांच पड़ताल में इसका खुलासा हुआ तो एसएसबी के अधिकारी भी हैरान रह गए। इसके बाद फौरन उसे हिरासत में ले लिया। मामला जिले के नरकटियागंज एसएसबी 44वीं वाहिनी का है। सामान्य आरक्षी के पद पर ज्वाइनिंग करने आये विलासपुर छतीसगढ़ निवासी कर्मवीर सिंह को एसएसबी मुख्यालय दिल्ली के निर्देश पर गिरफ्तार किया गया है।
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शिकारपुर के सहायक थानाध्यक्ष श्याम किशोर पीड़ित ने बताया कि एसएसबी 44वीं वाहिनी की ओर से एक जवान को शिकारपुर पुलिस को सुपुर्द किया गया है। उस पर फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर एसएसबी में ज्वाइनिंग करने का आरोप है। मामले में एसएसबी 44वीं वाहिनी के उप निरीक्षक कश्मीर सिंह ने शिकारपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। एफआईआर में बताया है कि 65वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल बगहा में कर्मवीर सिंह को आरक्षी सामान्य पद पर पदस्थापना मिला था। कर्मवीर सिंह की जगह छतीसगढ़ के विलासपुर जिला के हेमु नगर गांव निवासी मनोज कुमार नाम फर्जी तरीके से अपनी नियुक्ति के लिए 44वीं वाहिनी में 22 अक्टूबर को नई एसएसबी दिल्ली मुख्यालय को रिपोर्ट किया था।
जांच में कर्मवीर सिंह की जगह युवक मनोज कुमार निकला
इधर, 65वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल बगहा के आरक्षी कृष्णा केसरी कर्मवीर सिंह को ज्वाइनिंग कराने के लिए आया था। कागजात के मिलान में कर्मवीर सिंह का फोटो, मेडिकल रिपोर्ट, आधार कार्ड, ऑनलाइन डाटा वेरिफिकेशन, आर्थिक प्रमाण पत्र का मिलान करने पर गलत निकला। जिसकी जानकारी मुख्यालय पटना के महानिरीक्षक को दिया गया। जांच में कर्मवीर सिंह की जगह युवक मनोज कुमार निकला। इधर, युवक के फर्जीवाड़ा की सुचना मिलते ही एसएसबी मुख्यालय में हड़कंप मच गया है।
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युवक ने कहा- वह मृत चचेरे भाई के नाम पर नौकरी करने पहुंच गया था
फर्जीवाड़ा में फंसे मनोज ने शिकारपुर पुलिस के समक्ष इस बात का खुलासा किया कि कर्मवीर सिंह उसका चचेरा भाई है। नियुक्ति पत्र मिलने के दिन ही सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। चूंकि दोनों का चेहरा एक-दूसरे से मिलता जुलता था, इसलिए उसने अपना आधार कार्ड और सभी पहचान मिटाकर खुद कर्मवीर सिंह बन गया। नौकरी की लालच में वह एसएसबी में नियुक्ति पत्र समर्पित करते हुए योगदान करने पहुंचा था।