बनगांव में धार्मिक रूप से होली मनाई जाती है, जिसमें संत लक्ष्मीनाथ कुटी, विषहरी स्थान, भगवती स्थान, ठाकुड़बारी में लोगों के हूजूम का पहुंचना काफी महत्वपूर्ण है। बनगांव में होली की शुरुआत में सुबह से दोपहर के 12 बजे तक सभी एक दूसरे को धूल व मिट्टी लगाकर होली की शुभकामना दे रहे थे। वहीं दोपहर बाद गांव के रामचंद्र खां हो या मो अब्दुल सभी एक ही रंग में रंगे नजर आये। कोई एक दूसरे को रंग तो कोई गुलाल लगा फगुआ की शुभकामना दे रहा था। होली में दिल मिल जातें हैं.... दुश्मन भी गले मिल जाते है... इन्हीं बातों को मान निकले हजारों लोग भगवती स्थान में जमा होकर बनने वाली मानव श्रृंखला का अद्भुत नजारा एवं उसमें शामिल लोगों का उत्साह ब्रज की होली की तरह ही बनगांव की होली को स्थापित कर रही थी। भगवती स्थान में जुटने से पहले गांव के पछवारी टोला एवं दक्षिणवारी टोला का मिलन राजा मनसाराम खां के दरवाजे से विषहरी स्थान के बीच होता है। उसी तरह पुवारी टोला एवं रामपुर बंगला के बीच भी लोगों का मिलन होता है।