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Bihar Nawada News : नवादा बिहार से जुड़े यह तथ्य पढ़ लें तो बयान का रुख बदल लेंगे राजनेता; जानिए, क्या है खेला

सार

Bihar News : बिहार के नवादा में बुधवार की रात हुई आगजनी की खबर दिल्ली तक आग जैसी फैली। गुरुवार को दिनभर राजनीति हुई। लेकिन, यकीन मानिए कि यहां सामने लाए जा रहे तथ्यों को पढ़ने के बाद बिहार में राजनीति करने वालों के बयानों का रुख बदल जाएगा।
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बिहार के नवादा में आगजनी के बीच 'दलित' शब्द आने के कारण ही इतनी राजनीति हुई, मगर सच इससे आगे है। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
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दलितों के घरों को दबंगों ने फूंका- बस, इस एक लाइन पर देशभर के राजनेता बिहार के नवादा की घटना को लेकर टूट पड़े। राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव से लेकर दिल्ली में बैठे कांग्रेसी दिग्गजों ने सारे घोड़े खोल दिए। लेकिन, गलती यहीं हो गई लगती है। यहां दलित और दबंग का रिश्ता इन्होंने बिहार की पिछड़ी-अगड़ी जातियों से लगा लिया। लेकिन, जैसे तथ्य सामने आ रहे हैं- बिहार की राजनीति या बिहार में राजनीति करने वालों को अब या तो चुप्पी साध लेनी होगी या फिर अपने पैरों में कुल्हाड़ी ही मारने पर वह आमादा होंगे। जो आशियाने जलाए गए, उसकी कहानी कब्जा और भूमि सर्वे के बीच झूलती दिख रही है। दूसरी ओर, जिनके घर जलाए गए और जो आरोपी हैं- उनकी जातियों के कारण नेताओं का गणित गड़बड़ा जाएगा। कैसे, पढ़िए और समझिए।

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दलित-दबंग के नाम पर चली राजनीति, मगर पिछड़े-अगड़े नहीं लड़े 
नवादा के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के देदौर के कृष्णा नगर महादलित टोले में बुधवार की रात आग लगा दी गई थी। इस आगजनी के बीच मारपीट-गोलीबारी की घटना को भी अंजाम दिया गया था। इसी आधार पर हर जगह खबर चली कि दलितों के घरों को दबंगों ने फूंक दिया। करीब 24 घंटे के दरम्यान नवादा से लेकर पटना-लखनऊ होते हुए दिल्ली तक इसपर राजनीतिक बयानबाजी चली। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सुशासन पर सवाल उठना लाजिमी था, वह उठा भी। लेकिन, उससे ज्यादा हंगामा 'दलित' और 'दबंग' के नाम पर मचा। तो सबसे पहली और खरी बात यह कि यहां अगड़ी-पिछड़ी जाति की लड़ाई नहीं थी। यह लड़ाई आज-कल की नहीं, 1995 से चल रही थी। बस, बुधवार की रात आर या पार में बदल गई। दोनों तरफ बिहार के पिछड़े और बहुसंख्यक ही थे, जिनके बीच घमासान मचा। किसी अहंकार या जाति की लड़ाई नहीं, यह जमीन की लड़ाई है, जिसमें भू-सर्वे की मौजूदा बिहार सरकार की योजना ने 'आग में घी' की भूमिका निभाई। 
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जानिए, जमीन की इस लड़ाई का बैकग्राउंड
घटना का ताजा कारण जमीन सर्वे की प्रक्रिया है। दरअसल, नदी किनारे करीब 15 एकड़ भूमि है। इसके कुछ भाग पर मुसहर (मांझी) और रविदास समाज के लोग झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं और बाकी जमीन पर खेती कर रहे हैं। इस जमीन पर 1995 से टाइटल सूट (22/1995) नवादा व्यवहार न्यायालय में चल रहा है। यानी, जमीन पर हक की लड़ाई कोर्ट में है। अब हुआ यह कि नए सर्वे के दरम्यान यह जमीन खतियान पर रमजान मियां के नाम पर दर्ज नजर आई। रमजान मियां के परिजनों से कृष्णा नगर के ही पासवान समाज, लोहानी बिगहा के यादव समाज और प्राण बिगहा के चौहान समाज (बेलदार जाति) के अलावा नालंदा जिला के रहुई थाना के रघुनाथपुर के चौहान समाज (बेलदार जाति) के लोगों ने रजिस्ट्री करवा ली। मतलब, जमीन रमजान मियां से इन लोगों ने खरीद ली। कागज पर तो यह हो गया, लेकिन भौतिक स्थिति वही रही। मुसहर और रविदास समाज के लोग जमीन पर कब्जा छोड़ने को तैयार नहीं। जमीन खरीदने वाले भू-सर्वे की प्रक्रिया के समय ही उस कब्जे को हटाने पर आमादा हुए। इसी में आगजनी की घटना को अंजाम दिया। 

आंखों देखी में नाम किसका आया सामने
घटनास्थल पर उपस्थित व्यास मुनी (पिता- संजय मांझी) ने बताया कि उक्त स्थल से संबंधित जमीन पर टाइटल सूट व्यवहार न्यायालय नवादा में चल ही रहा है और इधर जबरन अपनी जमीन बताकर खाली कराने के नाम पर फायरिंग करते हुए आगजनी की घटना को अंजाम दिया गया। व्यास मुनी के अनुसार, नन्दू पासवान व पन्नू पासवान (पिता- स्व. सौखी पासवान), शिबू पासवान (पिता- स्व. जगदीश पासवान), श्रवण पासवान (पिता- सुमेश्वर पासवान) के साथ प्राण बिगहा, नवादा के कई लोग, लाेहानी बिगहा नवादा के यमुना चौहान, सोमर चौहान, नूनू प्रसाद (पिता- स्व. खीरू चौहान), आशीष यादव (पिता-देवन यादव), रहुई नालंदा के दशरथ चौहान, ब्रदी चौहान, रामशरण चौहान, मिथिलेश चौहान व यदुनंदन चौहान (सभी के पिता- स्व. चौठी चौहान आदि ने फायरिंग-आगजनी की। 

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की बातों से समझें राजनीति
इस केस में दलित-दबंग का जो खेल हुआ, उसमें पिछड़ा-अगड़ा की बिहार वाली लड़ाई समझ सारे कूद तो गए, लेकिन आरोपियों की जातिगत पहचान से बिहार की या बिहार में राजनीति करने वालों को आगे सोच-समझ कर चलना होगा। आरोपी नन्दू पासवान, पन्नू पासवान, शिबू पासवान, श्रवण पासवान आदि दुसाध जाति (पासवान) से आते हैं। यही कारण है कि केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने बहुत सावधानी से कहा कि बिहार की राजनीति में जिस जाति का वर्चस्व है, उस यादव जाति के कुछ लोगों ने पासवान जाति के कुछ लोगों को आगे कर इस घटना को अंजाम दिया है। दरअसल, हमले का शिकार होने वालों में मांझी की जाति के भी लोग हैं और रविदास भी। हमलावरों में दुसाध जाति के कई लोगों का नाम है और दलित-महादलित की राजनीति के रहनुमाई में कभी जीतन राम मांझी और दिवंगत राम विलास पासवान के बीच कसमकस रहा करती थी और अब चिराग पासवान अपनी दुसाध जाति को अपने साथ लेकर चलते नजर आ रहे हैं। जाहिर तौर पर जीतन राम मांझी, दलितों के बीच बंटवारे की नौबत नहीं चाहेंगे। इसके अलावा, वह केंद्र में मंत्री भी हैं और उनके बेटे बिहार की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार में मंत्री भी हैं।  

आरोपियों में 'चौहान' देख कूदे, मगर जान लीजिए जाति
आरोपियों के नाम में 'चौहान' टाइटल देखकर कई मीडियाकर्मियों और नेताओं ने इन्हें अगड़े वर्ग से राजपूत मान लिया, जबकि हकीकत यह है कि लाेहानी बिगहा नवादा के यमुना चौहान, सोमर चौहान, नूनू प्रसाद हों या रहुई नालंदा के दशरथ चौहान, ब्रदी चौहान, रामशरण चौहान, मिथिलेश चौहान व यदुनंदन चौहान- सभी बेलदार जाति के लोग हैं। यह भी अति पिछड़ी जाति है।

आबादी के आधार पर सबसे दबंग जाति के कारण मांझी का निशाना
लोहानी बिगहा, मुफस्सिल थाना, नवादा निवासी रामाशीष यादव बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव की स्वजातीय हैं। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के पास जो फीडबैक है, उसमें रामाशीष और उनके कुछ लोगों ने ही पासवान और बेलदार जाति के लोगों को भड़काकर इस घटना को अंजाम तक पहुंचाया। दरअसल, मांझी की इस बात के पीछे बड़ा तर्क बिहार की जातीय जनगणना के बाद कई बार हो चुकी ऐसी वर्चस्व की लड़ाई है, जिसमें यादव जाति के लोगों ने सर्वाधिक आबादी के आधार पर मनमानी की है। पिछले साल पटना के फतुहा में कई लोगों की हत्या और कई बहुमंजिला मकानों को फूंकने की घटना के समय बिहार में महागठबंधन सरकार थी, लेकिन कोई नेता यहां नहीं पहुंचे थे क्योंकि दोनों तरफ यादव जाति के लोग थे। 
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बिहार को नहीं समझने वालों से अलग, जमीन पर रहे नेताओं को देखें
मुसहर समाज के नेताओं में बिहार सरकार के मंत्री रत्नेश सदा पीड़ितों से मिलने पहुंचे और घटनास्थल का जायजा लिया। जदयू नेता रत्नेश सदा की जाति के लोग ज्यादा पीड़ित हैं, लेकिन उन्होंने पीड़ित परिवारों को ढांढ़स बंधाते हुए यही भरोसा दिलाया कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यादव समाज के नेता पूर्व मंत्री राज बल्लभ प्रसाद की पत्नी राजद विधायक विभा देवी घटनास्थल पर पहुंचीं और जायजा लेने के बाद पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने का भरोसा दिया। नवादा की राजनीति करने वाली विभा देवी को दोनों पक्षों की जातियों का पूरा पता था, इसलिए उन्होंने किसी को दबंग नहीं बताया। कुशवाहा जाति के नेता और नवादा लोकसभा के राजद प्रत्याशी रहे श्रवण कुशवाहा ने घटनास्थल पर पहुंचकर न्याय की मांग की, पीड़ितों के बीच 50 हजार रुपये की मदद की, लेकिन दबंग-दलित आदि का बवाल नहीं किया। नवादा राजद जिलाध्यक्ष उदय यादव भी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने सुशासन पर सवाल उठाए, लेकिन किसी जाति को दबंग बताने से बचते नजर आए।

(इनपुट: राजकमल, नवादा)

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