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Bihar News : बीडीओ के जाली हस्ताक्षर से बीस हजार प्रमाण पत्र बने, यूपी पुलिस ने आरोपी को बिहार से दबोचा

Fri, 30 Aug 2024 09:46 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, दरभंगा

सार

Bihar : प्रखंड विकास पदाधिकारी का हस्ताक्षर कर लगभग 20 हजार जाली प्रमाणपत्र बनाये गये। शिकायत मिलने पर जिला प्रशासन ने आरोपी की गिरफ्तारी के आदेश जारी किये। अब उत्तर प्रदेश की पुलिस ने आरोपी को बिहार से गिरफ्तार किया है।
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गिरफ्तार आरोपी और परिजन। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
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दरभंगा में यूपी की पुलिस ने लगभग 20 हजार फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत करने के मामले में एक युवक को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार युवक बहादुरपुर थाना क्षेत्र के बिउनी गांव के रहने वाले दिलीप लालदेव का पुत्र विकेश है। यूपी पुलिस ने रविकेश की गिरफ्तारी के लिए 25 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। यह गिरफ्तारी बहादुरपुर थाना क्षेत्र के बिउनी गांव से की गई है। पुलिस का कहना है कि आरोपी रविकेश इस मामले का मास्टरमाइंड बताया है।

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लगभग 20 हजार बनाये जाली प्रमाण पत्र 
पुलिस का कहना है कि शातिर रविकेश ने रायबरेली में बीडीओ के आईडी से 19,184 फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाण-पत्र बनाकर लोगों को दे चुका था। इस बात की जानकारी होने पर जिला प्रशासन की नींद खुली और फिर मामला दर्ज कर आरोपी की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित की गई। गिरफ्तारी के बाद परिजनों को रविकेश की नौकरी के सच का पता चला।

परिजनों ने लगाया आरोप, कहा- पुलिस मेरे बेटे को फंसा रही है 
परिजनों का कहना है कि रविकेश ने लव मैरेज किया था। उनका कहना है कि रविकेश लालदेव अपने बेटे के छठियार में छह महीना पहले घर आया था। और अब करीब एक महीने से रविकेश से परिजनों की बातचीत नहीं हो पा रही थी। उसके मोबाइल फोन पर कॉल नहीं लग रहा था, जिससे वे चिंतित भी थे। उत्तर प्रदेश की पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी की जानकारी उसके पिता दिलीप लालदेव को दी है। रविकेश की मां और पिता का रो-रो कर बुरा हाल है। उन्हें इस बात का विश्वास नहीं हो रहा है कि उसका बेटा गिरफ्तार कर लिया गया है। हालांकि वेलोग अपने बेटे को निर्दोष बता रहे है। परिजनों का कहना है कि मेरा बीटा आज तक यूपी गया ही नहीं, उसे फंसाया गया है। वह दिल्ली में एमबीए की पढ़ाई करने के बाद नई दिल्ली में ही नौकरी कर रहा था। पिता का कहना है कि रविकेश को उन्होंने अपनी जमीन बेचकर एमबीए की पढ़ाई दिल्ली में रखकर करवाया था। पढ़ाई के बाद वह दिल्ली में ही नौकरी कर रहा था। परिजनों का यह भी कहना है कि रविकेश हर महीने घर का खर्च भी भेजा करता था।

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