फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Supaul Lok Sabha : आज सुपौल में सत्ता का संग्राम; चुनाव के बहाने हो रही चाय पर चर्चा, इन मुद्दों पर बातचीत

Sun, 21 Apr 2024 11:34 AM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सुपौल

सार

'अमर उजाला' का चुनावी रथ सुपौल पहुंच चुका है। सुबह चाय पर चर्चा में आम मतदाता अपनी बात रखी। इसके बाद दोपहर में युवाओं के मुद्दों पर चर्चा होगी। वहीं, शाम को राजनीतिक दलों के नेताओं सवाल-जवाब होंगे।
विज्ञापन
सुपौल में चाय पर चर्चा। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पंद्रहवीं लोकसभा चुनाव में लोगों ने पहली बार सुपौल लोकसभा सीट के लिए मतदान किया था। 2009 में हुए परिसीमन के बाद सुपौल लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र अस्तित्व में आया। कोसी की धारा से सुपौल की पहचान है। अब तक यहां हुए तीन लोकसभा चुनाव में निवर्तमान सांसद को जनता ने नकार दिया है और वह पूर्व हो गए हैं। दो बार जदयू तो एक बार कांग्रेस प्रत्याशी ने यहां जीत का परचम लहराया है। पहली बार एनडीए प्रत्याशी के तौर पर जदयू के विश्वमोहन कुमार ने यहां जीत दर्ज की। हालांकि 2014 में जदयू एनडीए से अलग हुई तो विश्वमोहन भाजपा में चले गए। भाजपा ने कामेश्वर चौपाल को उम्मीदवार बनाया।
विज्ञापन




त्रिकोणीय मुकाबले में कांग्रेस की रंजीत रंजन ने जदयू के दिलेश्वर कामत को मात दी। हालांकि 2019 में जदयू वापस एनडीए में लौटी और दूसरी बार प्रत्याशी बने दिलेश्वर कामत ने कांग्रेस की तत्कालीन निवर्तमान सांसद को करीब ढाई लाख वोट से हरा दिया। दिलेश्वर इस बार फिर जदयू की टिकट पर एनडीए प्रत्याशी हैं। वही लोकसभा क्षेत्र के अस्तित्व में आने के बाद राजद ने पहली बार यहां अपना उम्मीदवार उतारा है। राजद प्रत्याशी चंद्रहास चौपाल मधेपुरा जिले के सिंहेश्वर विधानसभा क्षेत्र से पहली बार के विधायक हैं। इससे पूर्व वह मुखिया थे और भाजपा में ही शामिल थे। 2020 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी ने उन्हें सिंहेश्वर से से चुनाव मैदान में उतारा था। इसके अतिरिक्त निर्दलीय प्रत्याशी बैद्यनाथ मेहता इस बार चर्चा में हैं, जो दोनों ही प्रमुख गठबंधन का चुनावी गणित बिगाड़ सकते हैं। पूर्व आईआरएस अधिकारी रहे बैद्यनाथ मेहता ने 7 साल की नौकरी बीते साल ही छोड़ वीआरएस ले लिया और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव थे। एनडीए में सीट शेयरिंग के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी। वह एक साल से क्षेत्र में काफी सक्रिय हैं।

इस समय 'अमर उजाला' का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' भी बिहार में है और अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत सुपौल में लोगों से बातचीत करने के लिए पहुंच चुका है। शहर के महावीर चौक के पास चाय पर चर्चा के बहाने वोटरों से उनके मन की बात पूछी जा रही। समझा जा रहा है कि वह चाय की चुस्की के साथ सुपौल लोकसभा सीट की किन बातों पर विमर्श कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन





 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें