बिहार की महागठबंधन सरकार को बुधवार को तगड़ा झटका लगा है। बताया जा रहा है कि राज्य के मंत्री कार्तिकेय सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्हें आज सुबह ही राज्य के गन्ना उद्योग मंत्री का प्रभार सौंपा गया था। इससे पहले वे कानून मंत्रालय संभालते थे।
बिहार में सियासी ड्रामा के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपहरण के आरोप से घिरे कार्तिकेय सिंह (Kartikeya Singh) से कानून मंत्रालय की जिम्मेदारी छीन लिया था। सीएम ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और इसे राज्यपाल को भेज दिया है।
बताया जा रहा है कि राज्यपाल ने भी उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। बिहार के राजस्व मंत्री आलोक कुमार मेहता को गन्ना उद्योग मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। कार्तिकेय से प्रभार लेने के बाद सीएम नीतीश ने कानून मंत्रालय की जिम्मेदारी शमीम अहमद को सौंप दी थी। शमीम अहमद इससे पहले बिहार सरकार के गन्ना -उद्योग मंत्री थे।
कार्तिकेय कुमार सिंह के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज है और इसी वजह से कोर्ट ने उनके खिलाफ वारंट जारी किया था और 16 अगस्त को सरेंडर करने के लिए कहा था। विवाद उस समय उठा जब बाहुबली कार्तिकेय सिंह (Kartikeya Singh) को सरेंडर कराने के बजाय उसी दिन कानून मंत्री पद की शपथ दिला दी गई थी।
कार्तिकेय के खिलाफ मामला क्या है?
दरअसल, साल 2014 में एक शख्स का अपहरण हुआ था। इस मामले में बिहार के नए कानून मंत्री कार्तिकेय सिंह भी आरोपी हैं। उनके खिलाफ अदालत ने वारंट जारी किया है। उन्हें 16 अगस्त को पेश होना था लेकिन वे उस दौरान शपथ ले रहे थे। कार्तिकेय सिंह ने अभी तक ना तो कोर्ट के सामने सरेंडर किया है ना ही जमानत के लिए अर्जी दी है। कोर्ट ने अब इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख एक सितंबर को दे दी है।
कार्तिकेय के ऊपर कितने मुकदमे चल रहे हैं?
चुनावी हलफनामे में कार्तिकेय ने अपने ऊपर चार मामले दर्ज होने की जानकारी दी है। इन मामलों में उनके ऊपर चोरी, अपहरण, दंगा करने, सरकारी काम में बाधा पहुंचाने, आपराधिक साजिश रचने, जबरन वसूली, घातक हथियारों से लैस होकर दंगा करने से जुड़े आरोप हैं। इसके साथ ही सार्वजनिक सड़क, पुल, नदी या चैनल को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप उनके ऊपर है।