बिहार सरकार ने 100 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव खो दिया और उसे पता तक नहीं चला। सस्ती इलैक्ट्रॉनिक डिवाइसेज बनाने वाली कंपनी डेटाविंड ने दरअसल बिहार में अपने 100 करोड़ के प्रोजेक्ट से हाथ पीछे खींच लिए हैं। टेलीग्राफ की खबर के मुताबिक बिहार से रिस्पॉन्स नहीं मिलने के बाद अब कंपनी हैदराबाद में प्रोजेक्ट के लिए जमीन तलाश रही है।
डेटाविंड का हेडक्वॉर्टर कनाडा में है, भारत में कंपनी पहली यूनिट 2012 में पंजाब के अमृतसर में लगाई थी। कंपनी को सस्ते आकाश टेबलेट बनाने के लिए जाना जाता है, वही टेबलेट जिसे सरकार की योजना तहत विद्यार्थियों को बांटा गया था। डेटाविंड के आफिस यूरोप और और अमेरिका में भी हैं।
हैदराबाद में लगाए जा रहे प्लांट में एक दिन में पांच हजार टेबलेट और स्मार्टफोन तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि अमृतसर प्लांट में महीने भर में एक लाख टेबलेट और स्मार्टफोन बनाने का लक्ष्य है।
'बिहार ने ठुकराया, तेलंगाना ने अपनाया'
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डेटाविंड के भारत में सीईओ सुनीत सिंह टुली ने ई-मेल के जरिए अग्रेजी अखबार को बताया कि उनकी कंपनी ने दो-एक राज्यों की सरकारों से कंपनी का प्लांट लगाने के लिए निवेदन किया था। उनमें बिहार भी एक राज्य था, लेकिन वहां की सरकार ने कोई ठोस जवाब नहीं दिया। तेलंगाना सरकार ने हमारे प्रस्ताव पर गौर किया और हम देश में कंपनी की दूसरी करीब 100 करोड़ की यूनिट लगाने जा रहे हैं।
डेटाविंड ने 2014 में बिहार के तत्कालीन आईटी मिनिस्टर शाहिद अली से बात की थी। शाहिद अली जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) पार्टी से है।
मौजूदा बिहार के आईटी मिनिस्टर अशोक चौधरी के सेक्रेटरी राहुल सिंह की मानें तो उन्हें डेटाविंड के इस प्रस्ताव के बारे में जानकारी ही नहीं थी।
पांच साल में अरबों के प्रस्तावों नहीं मिली जगह
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उद्योग मंत्री जय कुमार सिंह ने प्रस्ताव की जानकारी होने से इनकार किया। उन्होंने कहा आईटी डिपार्टमेंट ने उन्हें इस बारे में कुछ नहीं बताया।
डेटाविंड वाला प्रस्ताव पहला मामला नहीं है जो बिहार सरकार के हाथ से फिसल गया है, इससे पहले इसी वर्ष जनवरी में उद्योग विभाग ने यह स्वीकारा कि पिछले पांच वर्षों में 6 हजार 12 करोड़ का निवेश हुआ, जबकि 71 हजार 243 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव मिला था।
पिछले साल ही डेढ़ सौ करोड़ का केवेंटर मेगा फूड पार्क का प्रोजेक्ट बिहार से फिसलकर झारखंड चला गया। प्लांट को भागलपुर जिले के कहलगांव में लगाया जाना था, लेकिन किसानों और जमीदारों के विरोध प्रदर्शन के चलते प्लांट वहां नहीं लग सका।
शराब बंदी के बाद हालात और बुरे, जा सकती हैं शराब कंपनियां
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साल 2012 में ताज ग्रुप ने एलान किया था कि पटना में एक करीब 92 करोड़ की लागत से फाइव स्टार होटल बनाया जाएगा लेकिन उसके लिए भी जमीन नहीं मिल सकी।
यही नहीं, एक उद्योगपति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बिहार में शराब बंदी के बाद यह संभावना भी बनी है कि कार्ल्स बर्ग, यूबी ग्रुप और मोलसोन कूर्स जैसी शराब बनाने वाली बड़ी कंपनियां राज्य से अपना रास्ता नाप लेंगी।
यूबी ग्रुप ने बिहार में अपना प्लांट लगाने के लिए साढ़े सात सौ करोड़ रुपए खर्च किए थे। फिलहाल कारोबार की दृष्टि से बिहार के हालात बुरे है। नए निवेशक राज्य में पैसा लगाना नहीं चाहते हैं, ऐसा माहौल बना है तो इसके पीछे खामी सरकार की ही कही जाएगी जो कि कारोबारियों और निवेशकों को जमीन मुहैया कराने में पीछे रही है और अब भी सरकार उदासीन लगती है।