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बिहारः लालू बोले हुंकार के बाद केंद्र ने पलटा अपना फैसला

Wed, 08 Jun 2016 12:20 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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राजद नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा को निशाना बनाने का कोई मौका नहीं छोड़ते। दो दिन पहले केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रोफेसरों की नियुक्ति में ओबीसी कोटे का आरक्षण खत्‍म करने का मुद्दा उठाने के बाद उन्होंने सरकार पर फिर निशाना साध दिया है। इस बार उन्होंने इस मुद्दे पर खुद ही अपनी पीठ ठोंक ली है। लालू ने दावा किया कि बहुसंख्यकों की दमदार आवाज के कारण ही केंद्र को अपना फैसला वापस लेना पड़ा। 
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ट्वीटर के जरिए अपनी बात रखते हुए लालू यादव ने कहा, ये लालू की नहीं देश के 85 फीसदी बहुसंख्यकों की दमदार आवाज का असर है। केंद्र को कल ही चेताया था और कल ही रोल बैक कर लिया।

हालांकि लालू ने इस बहाने सीजेआई के सरकार के आलोचना करने के मुद्दे को भी हवा दे दी। कहा, सीजेआई कह रहे हैं कि केंद्र अपने धर्म का पालन नहीं कर रहा। इस पर कोई चर्चा नहीं करता, लेकिन बिहार में सामाजिक न्याय की सरकार है तो जंगलराज है। 
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दो दिन पहले लालू ने साधा था केंद्र और मोदी पर निशाना

बता दें कि कल लालू ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों में एसोसिएट प्रोफेसरों और प्रोफेसरों की नियुक्ति में ओबीसी कोटा खत्म करने का आरोप लगाते हुए कहा कि, ''आरएसएस के ईशारे पर स्मृति ईरानी ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों से ओबीसी कोटे के एसोसिएएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के पदों पर आरक्षण खत्म कर दिया है"। 

लालू यहीं नहीं रुके उन्होंने इस बहाने मोदी को भी लपेटे में लेते हुए कहा था, "ब्राह्मणवादी संगठन RSS का बच्चा है बीजेपी, पिछड़ा दलित विरोधी BJP को वंचितों और पिछड़ों का हक नहीं खाने देंगे। ये लोग किसी मुगालते में ना रहें।" लालू यहीं नहीं रुके कहा- "देश का 60 फीसदी से ज्यादा OBC वर्ग RSS/BJP का अन्याय नहीं सहेगा। इनकी ईंट से ईंट बजा देंगे। कहां है छाती ठोकने वाला OBC प्रधानमंत्री?

मोदी और आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा, "ये शातिराना तरीके से आरक्षण खत्म करना चाहते है। हमारा हक छीन कर किसे देना चाहते है? गुजरात/राजस्थान में इन्होने क्या किया कौन नहीं जानता?" लालू ने प्रधानमंत्री मोदी पर तंज कसते हुए कहा, "विडम्बना व त्रासदी देखिए सामाजिक न्याय विरोधी यह काम पिछड़ा मां का बेटा होने का दावा करने वाले ओबीसी प्रधानमंत्री के शासनकाल में हो रहा है। आरक्षण भीख नहीं है, दया नहीं है। वंचितो का संविधान प्रदत्त अधिकार है। छाती पर चढ़कर लेना जानते है। अब पहले वाला ज़माना नहीं रहा।" 
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