बिहार डरा हुआ है, डर है कि कोसी कहीं कहर ना बरसा दे। बाढ से निबटने की तैयारी कर रही है सेना, लोगों को भी बाढ़ संभावित इलाकों से हटाया जा रहा है।
बाढ़ से निबटने के लिए बिहार सरकार ने भी कमर कस ली है। बिहार के सीएम जीतन मांझी ने प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया है। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि,"फिलहाल स्थिति सामान्य है।"
कोसी के जलस्तर में कमी तो आई है लेकिन खतरा टला नहीं है। माना जा रहा है कि उत्तरी बिहार के नौ जिले इस बाढ़ से प्रभावित हो सकते हैं।
पहले भी आई थी प्रलय
खबर के मुताबिक NDRF की टीम भी मौके पर पहुंच गई हैं और लोगों को बाढ़ के खतरे के मद्देनजर हटा रही हैं। बाढ़ आने की स्थिति में हवाई मदद के इंतजामात भी किए जाएंगे।
आपको बता दें कि छह साल पहले 18 अगस्त 2008 में भी कोसी में बाढ़ आई थी। इस बाढ़ में 217 लोगों की मौत हुई थी जबकि हजारों पशु भी मारे गए थे। इस बाढ़ के कारण करीब सात लाख लोग प्रभावित हुए थे।
मामला क्या है?
दरअसल भूस्खलन में पूरी पहाड़ी के नदी में गिरने से सुनकोशी का जहां बहाव रुका है, वहीं 2.5 किलोमीटर के क्षेत्र में 130 मीटर की ऊंचाई तक 25 लाख क्यूसेक पानी जमा है।
लगातार बारिश से पानी बढ़कर 32 लाख क्यूसेक हो चुका है। इसे नियंत्रित करके धीरे धीरे छोड़ा जा रहा है लेकिन और बारिश से अगर अस्थाई बांध टूटा तो कोसी में प्रलय निश्चित है।
जबरन लोगों को हटाया गया
मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने रविवार को कोसी का हवाई सर्वेक्षण कर वीरपुर में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। मांझी ने कहा कि सरकार ने 20 हजार लोगों को जबरन कोसी तटबंध क्षेत्र से बाहर निकाला है।
मांझी ने कहा कि राज्य सरकार ने जो मदद मांगी थी, केंद्र ने मुहैया करा दी है। जानकारों का कहना है कि नेपाल में बडे़ क्षेत्र में कोसी का पानी फैल गया है जिससे भारतीय क्षेत्र में पानी का दबाव कम होता जा रहा है। कोसी बैराज को खाली कर दिया गया है।
राजनाथ ने की मांझी से बात
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने राज्य के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी से बात कर हालात की जानकारी ली। राजनाथ ने स्थिति से निपटने के लिए बिहार को हरसंभव मदद का भरोसा दिया है।
प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश पर सरकार ने तत्काल कदम उठाते हुए छह जिलों से अब तक करीब 44 हजार लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया है। नेपाल और बिहार में केंद्र की टीमें भेजी जा रही हैं। सेना, नौसेना और वायुसेना के विमानों, गोताखोरों और इंजीनियरों को बुलाया गया है।