ट्रांसफर की मांग पूरी हुई, लेकिन अभी यह मामला चलता रहेगा।
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गालीबाजी का दर्द सामने लाकर DG शोभा अहोटकर के खिलाफ आवाज उठाने वाले बिहार के सीनियर IPS अधिकारी IG विकास वैभव को आखिरकार ट्रांसफर मिल गया। उनके साथ ही DIG विनोद कुमार को भी राहत मिल गई। वह भी परेशान थे। 'अमर उजाला' ने सबसे पहले उनका दर्द सामने लाया था और उसके बाद यह खबर सोशल मीडिया, ऑनलाइन मीडिया के रास्ते प्रिंट मीडिया तक सुर्खियों में रहा। मामला सामने आने के बाद होमगार्ड DG शोभा अहोटकर ने IG विकास वैभव के खिलाफ पहले शोकॉज जारी किया और फिर विभागीय कार्यवाही के लिए फाइल बढ़ा दी। इधर, विकास वैभव ने जान का खतरा बताकर DG शोभा अहोटकर से मुक्ति मांगी। उनकी ही चिट्ठी में DIG बिनोद कुमार को प्रताड़ित किए जाने का भी जिक्र था। अब सरकार ने बीच का रास्ता निकालते हुए ट्रांसफर का आदेश जारी किया है। दोनों को पदस्थापन की प्रतीक्षा में पुलिस मुख्यालय में स्थानांतरित किया गया है। दोनों ही होमगार्ड में थे।
मुख्यमंत्री तक मामला पहुंचा, अब राहत
कुछ लोगों की नजर में यह IG विकास वैभव और DG शोभा अहोटकर के बीच विवाद था, लेकिन 'अमर उजाला’ ने लगातार यह दिखाया कि यह बिहारी अस्मिता का मामला था। DG ने बिहारी कामचोर, Bloody IG, बिहारी आदि के साथ मां-पत्नी के नाम पर भी प्रताड़ित किया था- यह बाद के घटनाक्रम में कागजों पर भी आ गया। मामला मुख्यमंत्री तक भी पहुंचा था, तो सीएम नीतीश कुमार ने उचित फोरम पर बात रखने की सलाह दे डाली थी। इसके बाद विभाग सख्ती की दिशा में था, लेकिन सच अंतत: सच साबित हुआ। पूर्व स्वीकृत अवकाश से लौटते ही IG विकास वैभव ने DG शोभा अहोटकर के आसपास रहने से खुद और परिवार को खतरा बताया था। गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव को IPS विकास वैभव की चिट्ठी में बताया गया कि उन्होंने DG शोभा अहोटकर की गालीबाजी की शिकायत न केवल दिसंबर 2022 से कई बार की, बल्कि उनके साथ कई अन्य पदाधिकारी भी DG से बचाने की गुहार लेकर गृह विभाग के चक्कर लगा चुके हैं। इसी चिट्ठी में डीआईजी की तबीयत बिगड़ने की भी जानकारी थी। इसलिए, दाेनों को ट्रांसफर से राहत दी।
...मगर अस्मिता की लड़ाई अभी चलती रहेगी
इस केस में अपना दर्द बताने वाले आईजी विकास वैभव पर डीजी शोभा अहोटकर ने कई आरोप लगाए हैं। उन आराेपों के जवाब में आईजी विकास वैभव ने नियमों के अनुलग्नकों समेत करीब 2000 पन्ने विभाग को भेज दिए। दो तरह का चार्ज बड़ा लगाया गया था- 1. सरकारी बैठक में अपने वरीय अधिकारी की बातों को रिकॉर्ड करने और उसकी जानकारी को सार्वजनिक करने, 2. लेट्स इंस्पायर बिहार के रूप में सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी से सरकारी कामकाज प्रभावित करने। इन दोनों का जवाब विभाग को पहुंच चुका है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विकास वैभव ने जिन अनुलग्नकों को दिया है- उस आधार पर डीजी शोभा अहोटकर के आरोप नहीं टिक रहे हैं। सिर्फ ट्वीट करने का दोषी माना जा सकेगा, लेकिन उसकी परिस्थिति को लेकर दिया जवाब मानवीय आधार पर देखा जाएगा। डीजी के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन खड़ा करने का आरोप भी बाद में जोड़ा गया, लेकिन इसके लिए सीधे आईजी विकास वैभव पर कोई आरोप सिद्ध करना आसान नहीं होगा। इसके बावजूद आशंका है कि यह सवाल-जवाब अभी चलेगा क्योंकि बिहारी या ब्लडी होमगार्ड या कामचोर बिहारी जैसे शब्दों को बोलने का मामला ठंडा पड़ता दिख नहीं रहा है। अब भी बिहार के अलग-अलग जिलों से रोज बिहारी अस्मिता को लेकर प्रदर्शन की खबरें आ रही हैं।