राज्य कैबिनेट में बिहार राज्य विद्युत बोर्ड के पुनर्गठन का फैसला लिया गया है। शुक्रवार को हुई कैबिनेट की बैठक में विद्युत बोर्ड को पांच कंपनियों में बांटने के निर्णय पर मुहर लगा दी गई। साथ ही कर्मचारियों की ट्रांसफर स्कीम पर भी सहमति जताई है। सरकार ने कर्मचारियों की सेवा शर्तों को बरकार रखा है। बोर्ड के पुनर्गठन की अधिसूचना पिछले महीने ही जारी हो गई थी, लेकिन कर्मचारियों की ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर मामला फंसा था।
विद्युत बोर्ड जिन पांच कपंनियों में विभाजित होगा, उनमें एक होल्डिंग कंपनी होगी। बाकी चार में एक संचरण, एक उत्पादन और दो वितरण के लिए उत्तर व दक्षिण बिहार की अलग-अलग कंपनियां होंगी। कर्मचारियों की ट्रांसफर पॉलिसी के मामले पर 20 अक्तूबर को मुख्यमंत्री की सहमति मिलने के बाद इसे कैबिनेट के समक्ष लाया गया। कैबिनेट से पारित होने के बाद जल्द ही इसकी प्रभावी तिथि की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।
राज्य सरकार फिलहाल बोर्ड को 180 करोड़ रुपये मासिक के हिसाब से सालाना 2160 करोड़ रुपये की सहायता दे रही है। पुनर्गठन के पांच साल तक सरकार इस पर 14 हजार 99 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसके बाद सरकार इन कंपनियों को कोई सहायता नहीं देगी। सरकार को उम्मीद है कि पुनर्गठन के बाद बिजली कपंनियों को अधिक आसान शर्तो पर ऋण उपलब्ध हो सकेगा, जिससे पांचों कंपनियों के प्रबंधन को पूरी तरह से पेशेवर बनाया जायेगा। ऋण प्राप्त करने के लिए सरकार ने एक नीति भी बनायी है। सरकार ने अपने वादे के अनुसार वर्तमान या रिटायर्ड कर्मचारियों के हितों का पूरा ख्याल रखा है।
इसके अलावा कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री बालिका प्रोत्साहन योजना के लिए 59.64 करोड़ रुपये मंजूर किये गये हैं। इस योजना के तहत प्रथम श्रेणी से मैट्रिक पास करनेवाली छात्रओं को 10-10 हजार रुपये दिये जाते हैं। अब शिक्षा विभाग इस राशि को वितरित करायेगा। साथ ही कैबिनेट ने सामाजिक सुरक्षा के तहत वस्त्र वितरण कार्यक्रम के तहत राज्य के भूमिहीन, निर्धन, भिक्षुक एवं असहाय के बीच धोती, साड़ी, चादर और कंबल वितरण के लिए 50 लाख रुपये की स्वीकृति दी है।