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बिहार: अब भाजपा को सता रहा है ये बड़ा डर!

Mon, 17 Aug 2015 08:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा को मुस्लिम मतों के पार्टी के खिलाफ संभावित ध्रुवीकरण का डर सता रहा है। सूबे में राजद, जदयू और कांग्रेस के एक मंच पर आ जाने के बाद भाजपा ने इस वर्ग में बिखराव के लिए पूरी ताकत झोंकने का फैसला किया है।
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बिखराव की संभावना तलाशने के लिए बीते दिनों भाजपा नेतृत्व ने एक टीम को सूबे की यात्रा पर भेजा था और हाल ही में पार्टी में शामिल किए गए जदयू के पूर्व सांसद साबिर अली को इसका एक ब्लू प्रिंट तैयार करने का निर्देश दिया गया है।

फिलहाल, शुरुआती चरण में पार्टी ने इस वर्ग का ध्रुवीकरण रोकने के लिए भागलपुर में कांग्रेस शासनकाल में हुए सांप्रदायिक दंगे को मुद्दा बनाने का फैसला किया है।
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पर लगाई जा सकती है रोक!

चूंकि इस समय कांग्रेस, जदयू और राजद तीनों साथ हैं, इसलिए पार्टी को लगता है कि इस मुद्दे को तूल दे कर वह अल्पसंख्यक मतों का ध्रुवीकरण होने से रोक सकती है।

इसके अलावा मौलाना तौकीर रजा की पार्टी ऑल इंडिया इत्तेदाद ए मिल्लत काउंसिल (एआईएमसी) ने मुस्लिम बहुल 40 सीटों पर उम्मीदवार खड़ा करने की घोषणा की है। पार्टी को लगता है कि तौकीर रजा के जरिए भी मुस्लिम वोटों का एकपक्षीय ध्रुवीकरण पर रोक लगाई जा सकती है।

लोकसभा चुनाव में जीत के बावजूद भाजपा लालू के (मुस्लिम-यादव) माय वोट बैंक में सेंध नहीं लगा पाई थी। पार्टी ने यादव वोट बैंक को साधने के लिए इस बिरादरी को ज्यादा टिकट देने का फैसला किया है, जबकि मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण रोकने के लिए पार्टी के पास फिलहाल कोई कारगर योजना नहीं है।
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दलित वोट बैंक साधने की तैयारी

चूंकि इस बिरादरी के मतदाताओं की संख्या सूबे में करीब 15 फीसदी है। इसलिए पार्टी को लगता है कि एकतरफा वोट पड़ने की स्थिति में यह बिरादरी करीब 5 दर्जन सीटों पर परिणाम को सीधे प्रभावित करने की स्थिति में है।

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक पार्टी ने जीतन राम मांझी के सहारे जदयू के महादलित वोट बैंक में सेंध लगाने का मौका हासिल कर लिया है।

रणनीतिकारों को उम्मीद है कि इससे पार्टी न केवल महादलितों को साध पाएगी, बल्कि लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान के जरिए करीब 15 फीसदी दलित आबादी को भी अपने पक्ष में कर पाएगी।
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