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बिहार चुनाव 2025: पुराने ‘मुस्लिम-यादव’ से नए ‘महिला-युवा’ समीकरण तक, नए 'MY' का मुकाबला तय करेगा चुनाव परिणाम

सार

पहले चरण के मतदान से पहले बिहार चुनाव का केंद्र अब स्थानीय मुद्दे बन चुके हैं। इस बार मुकाबला पुराने एमवाई (मुस्लिम-यादव) नहीं, बल्कि नए एमवाई, महिला और युवा वोटरों के बीच है। नीतीश सरकार को महिला सशक्तीकरण योजनाओं पर भरोसा है, जबकि तेजस्वी यादव युवाओं को नौकरियों के वादे से साधने में जुटे हैं।

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बिहार चुनाव - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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बिहार विधानसभा चुनावों के लिए पहले दौर का मतदान बृहस्पतिवार को हो जाएगा। अब तक हुए चुनाव प्रचार और विमर्श से एक बात साफ है कि इस बार पूरा चुनाव किसी राष्ट्रीय मुद्दे या विमर्श पर नहीं बल्कि स्थानीय और क्षेत्रीय मुद्दों के इर्द गिर्द सिमट गया है। भाजपा के हिंदुत्ववादी राष्ट्रवाद और विपक्ष के धर्मनिरपेक्षतावादी सामाजिक न्याय की चर्चा न के बराबर है। दिलचस्प है कि इस बार बिहार में पुराने एमवाई की जगह नए एमवाई का जोर है और चुनाव का नतीजा इन नए एमवाई के बीच हो रहे कड़े मुकाबले से तय होगा। इस नए एमवाई का रुख ही बिहार का चुनावी नैरेटिव है।
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लालू प्रसाद यादव के जमाने से राजद का मजूबत एमवाई (मुस्लिम यादव) जनाधार महागठबंधन के साथ मजबूती से जमा तो है लेकिन इस बार जिस एमवाई की चर्चा है वो है महिला और युवा मतदाता। एनडीए को भरोसा है कि नीतीश सरकार की महिला रोजगार योजना के प्रति परिवार की एक महिला के खाते में दस हजार रुपए जमा होने और पिछले 20 वर्षों में नीतीश सरकार के महिला सशक्तीकरण कार्यक्रमों ने उनके महिला जनाधार को न सिर्फ एकजुट रखा बल्कि उसमें इजाफा भी किया है। जबकि महागठबंधन के नेताओं का दावा है कि तेजस्वी यादव के रोजगार और प्रति परिवार एक व्यक्ति को नौकरी देने के वादे ने युवाओं को महागठबंधन के साथ जोड़ा है। जबकि नौकरी के मुद्दे पर नीतीश सरकार से युवा निराश हो चुके हैं।

महिलाओं और युवाओं की पसंद जुदा-जुदा
जाने माने चुनाव विश्लेषक अमिताभ तिवारी के मुताबिक बिहार में महिलाओं और युवाओं की पसंद अलग अलग है। उनकी संस्था वोट वाईब के सर्वेक्षण के मुताबिक जहां महिलाओं में एनडीए के पक्ष में 44 फीसदी रुझान है वहीं महागठबंधन के प्रति यह रुझान 38 फीसदी ही है। युवा महिलाओं में एनडीए के प्रति 48 फीसदी और महागठबंधन के प्रति 34 फीसदी रुझान है। युवा पुरुषों में भी एनडीए के प्रति 34 फीसदी, जबकि महागठबंधन के प्रति 41 फीसदी का रुझान है। तिवारी का निष्कर्ष है कि मतदान में यह देखना होगा कि महिलाओं और युवाओं में किसने ज्यादा मतदान किया। जिसका प्रतिशत ज्यादा होगा उसी हिसाब से एनडीए और महागठबंधन की सफलता तय होगी। अगर युवाओं की अपेक्षा महिलाओं ने ज्यादा मतदान किया तो एनडीए फायदे में रह सकता है और अगर महिलाओं की तुलना में युवाओं ने ज्यादा मतदान किया तो महागठबंधन को फायदा हो सकता है।
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