फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बिहार चुनाव पूर्वानुमान : तेजस्वी यादव का 10 लाख रोजगार का सिक्का चल गया, नीतीश कुमार हुए बूढ़े

Sun, 08 Nov 2020 01:31 AM IST
देव कश्यप शशिधर पाठक, नई दिल्ली

सार

  • एक्जिट पोल के पूर्वीनुमान से इसी तरह के संकेत।
  • आजतक-एक्सिस का सर्वे दिखा रहा तेजस्वी को सपने।
विज्ञापन
राजद नेता तेजस्वी यादव (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आजतक-एक्सिस का पिछले कुछ चुनावों से सर्वे काफी सही रहा है। इस सर्वे ने बिहार में मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे तेजस्वी यादव को तैयारी करने का संदेश दे दिया है। नीतीश कुमार का आखिरी दांव और तेजस्वी का कहना भी कि चाचा (नीतीश कुमार) अब बूढ़े हो गए हैं। राजनीति के पंडित भी मानते हैं कि इसकी सबसे बड़ी खुशी फिलहाल खुद को किंग मेकर बता चुके चिराग पासवान को हो रही होगी। उनका छोटा भाई तेजस्वी जो कुर्सी पर बेठने वाला है।

विज्ञापन


एबीपी-सी वोटर के सर्वे में भी महागठबंधन के ही सत्ता में आने के संकेत हैं। इन सर्वे एजेंसियों ने अपने नतीजे में नीतीश कुमार को बड़ा नुकसान और तेजस्वी यादव की पार्टी तथा महागठबंधन को बड़ा फायदा दिखाया है। महागठबंधन को 108-131 सीट मिल सकती है। कांग्रेस के खाते में 29-31 सीटें जाती दिखाई गई हैं। वहीं एनडीए के खाते में 104-108 सीट आने की संभावना जताई गई है। लोजपा को 1-3 सीटों का अनुमान व्यक्त किया गया है।


सी वोटर एनडीए को 116, महागठबंधन को 120, पीपुल्स प्लस एनडीए को 110, महागठबंधन को 102-120, टूडे चाणक्या एनडीए को 55, महागठबंधन को 180 सीटें दे रहा है। लगभग सभी एक्जिट पोल के अनुमान में महागठबंधन की ही बढ़त दिखाई गई है।
विज्ञापन


आखिर क्यों पिछड़ गए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ?
पटना में राजनीति के उतार-चढ़ाव का कई बसंत देख चुके वरिष्ठ पत्रकार नीरज कुमार का मानना है कि तेजस्वी यादव द्वारा पहली ही कैबिनेट में 10 लाख लोगों को रोजगार देने के वादे ने कमाल कर दिया। इससे बिहार के गांव-गाव में लोगों की रोजगार पाने की उम्मीद बढ़ गई। बिहार में चुनाव पूर्व सर्वे के काम में तीन सप्ताह तक व्यस्त रहे सूत्र का कहना है कि कोविड-19 संक्रमण के बाद बिहार की तरफ लौटे लोगों ने नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ खासी नाराजगी दिखाई।

चुनाव प्रचार के रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ उत्तर प्रदेश, पंजाब में काम कर चुके सूत्र का कहना है कि लोजपा के चिराग पासवान का अलग चुनाव लड़ने का फैसला महागठबंधन को संजीवनी दे गया। पीके के साथ काम कर चुके सूत्र का कहना है कि पूरे चुनाव अभियान में भाजपा, जद(यू) के चुनाव प्रचार अभियान में भी तालमेल का आभाव दिखा। वहीं महागठबंधन ने इस बार एकजुटता से लड़ाई लड़ी। पूरे चुनाव अभियान के हीरो केवल तेजस्वी यादव बने रहे।


भाजपा ने नीतीश कुमार को हराया
राजेश सिंह मुंगेर से हैं। आईटी के एक्सपर्ट हैं। एक राजनीतिक दल के लिए काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि सच पूछिए तो भाजपा ने बिहार में नीतीश कुमार को हराया है। आईटी प्रोफेशनल और बिहार में राजनीतिक पर काम कर रहे राजेश चौधरी भी मानते हैं कि भाजपा, नीतीश कुमार को इस बार झटका देना चाहती थी। राजेश का कहना है कि जिस दिन से चिराग ने अलग राह पकड़ी और भाजपा के नेताओं ने चिराग और लोजपा के साथ मीठा व्यवहार बनाए रखा, उस दिन से ही नीतीश कुमार और उनकी पार्टी को झटका लगना शुरू हो गया।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें