बिहार विधानसभा चुनाव में सीट के बंटवारे से पहले भाजपा के सहयोगियों ने मुख्यमंत्री पद के लिए दावा जताना शुरू कर दिया है। भाजपा की सहयोगी रालोसपा के मुखिया उपेंद्र कुशवाहा की ओर से इस पद पर दावेदारी जताने के बाद अब दूसरी सहयोगी लोजपा के मुखिया रामविलास पासवान भी अपनी दबी इच्छा को जाहिर करने से नहीं चूके।
उन्होंने कहा कि एक समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी उन्हें बिहार का मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे। बकौल पासवान जिस बैठक में वाजपेयी ने उन्हें सीएम बनाने का फैसला किया था, उस बैठक में वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा और सूबे के वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल थे।
उल्लेखनीय है कि राजद, जदयू और कांग्रेस के बीच सीटों का बंटवारा होने के बाद राजग में इसके लिए बातचीत का सिलसिला शुरू हो चुका है
कुशवाहा के बाद पासवान!
शुरुआती बातचीत में रालोसपा ने भाजपा को 102 सीटों पर चुनाव लड़ने की सलाह
देते हुए अपने लिए 67 सीटें मांगी हैं। बातचीत से पहले ही कुशवाहा की
पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया था।
माना जा
रहा है कि सहयोगी दलों की लगतार बढ़ रही महत्वकांक्षा के कारण भाजपा के लिए
सीटों का विवाद सुलझाना आसान नहीं होगा।
भाजपा की ओर से किसी को सीएम
पद का उम्मीदवार नहीं घोषित किए जाने के फैसले के बाद कुशवाहा के बाद अब इस
पद के लिए पासवान की दावेदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बढ़ रही भाजपा की मुश्किल
भाजपा के लिए
मुश्किल यह है कि सहयोगी दल अब उस पर अधिक से अधिक सीट हासिल करने का दबाव
लगातार बढ़ा रहे हैं।
इस क्रम में खासतौर पर रालोसपा ने सीएम पद पर दावे
के साथ ही लोजपा से अधिक सीटें मांग कर भाजपा की सिरदर्दी बढ़ाई है।
लोजपा
हालांकि 50 सीटें मांग रही है, मगर इसने साफ कर दिया है कि पार्टी से बगावत
कर पहले जदयू और फिर बाद में पूर्व सीएम जीतनराम मांझी का दामन थामने वाले
विधायकों को टिकट दिया जाना वह स्वीकार नहीं करेगी।