बिहार के विधानसभा चुनाव में एक युवा संगठन ने पहली बार ये प्रयास किया है कि लोग वोट देने से पहले नेताओं से सवाल पूछें। युवाओं के मसलों पर देशभर में सक्रिय आंदोलन कर चुके 'युवा हल्ला बोल' ने बिहार चुनावों के लिए 11-सूत्री एजेंडे की घोषणा की है। हल्ला बोल के संयोजक अनुपम बताते हैं कि इस दफा बिहार चुनाव में शौचालय, बिजली, लाइब्रेरी और गंदे शहर पर बात होगी। 'बोल बिहारी' मुहिम के जरिए लोग, वोट मांगने वाले नेताओं और उम्मीदवारों से कई सवाल पूछेंगे। इन सवालों में शिक्षा, स्वास्थ, रोजगार, पर्यावरण, खेती और बाढ़ जैसे गंभीर मुद्दे शामिल किए गए हैं।
बिहार में अवैध खनन के जरिये पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया गया। बाढ़ राहत के नाम पर करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार हो गया। असरदार कूड़ा प्रबंधन और जल निकासी नीति बनाकर शहरों में बाढ़-जल जमाव का समाधान क्यों नहीं हो सका। डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों पर रोकथाम क्यों नहीं लगा सकी। जल निकासी न होने के कारण थोड़ी बहुत बारिश से ही शहरों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने लगती है।
अनुपम के अनुसार, हमारे साथियों ने बैनर पोस्टर के जरिए लोगों के बीच जाने की योजना बनाई है। इन पर समस्याएं लिखी होंगी। सभी सरकारी स्कूलों में सालभर के अंदर बिजली, कंप्यूटर, इंटरनेट, लाइब्रेरी, मैदान, शौचालय और पेयजल जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं क्यों नहीं हो सकती। 47 फीसदी स्कूलों में बाउंड्री वॉल तक नहीं है। साथ ही 64.4 फीसदी स्कूलों में खेल का मैदान नहीं है। 31 फीसदी स्कूलों में लाइब्रेरी नहीं है। 58.6 फीसदी स्कूलों में बिजली नहीं है और 92 फीसदी स्कूलों में कंप्यूटर की व्यवस्था नहीं है।
शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ साथ रिक्त पदों पर 'मॉडल एग्जाम कोड' के तहत शिक्षकों की भर्ती क्यों नहीं हो सकती। बिहार में 2,75,255 शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं, जिन्हें 9 महीने में भरा जाना चाहिए, ये सवाल नेताओं से करेंगे। माध्यमिक स्तर पर 45 फीसदी और उच्च माध्यमिक स्तर पर 60 फीसदी शिक्षक प्रशिक्षण के अभाव में अयोग्य करार दिए गए हैं। इसका जिम्मेदार कौन है। तीसरी कक्षा के 54 फीसदी छात्र सामान्य जोड़-घटाव करने में सक्षम नहीं हैं और 46 फीसदी बच्चे अंक ठीक से नहीं पहचान पाते।
बिहार में (18-23) साल के नौजवानों में उच्च शिक्षा पाने वाले सिर्फ 13 फीसदी हैं, जो देश के किसी भी राज्य की तुलना में सबसे खराब स्थिति है। बिहार में 36 लाख से ज्यादा बेरोजगार लोगों के लिए सरकार की क्या योजना है। महिलाओं में 55.8 फीसदी की भयावह बेरोजगारी दर और 3.5 फीसदी की चिंताजनक श्रम भागीदारी देखी जा रही है।