लेकिन इस बार समीकरण बदल गया है। नीतीश कुमार एक बार फिर एनडीए का नेतृत्व कर रहे हैं। हालांकि, अभी एनडीए में कौन सी सीट किस पार्टी को जाएगी यह तय नहीं है। ऐसे में चर्चा होते ही राजनीतिक गलियारे में 2010 के फॉर्मूले पर सीट बंटवारे की प्राथमिक समझ बता दी जाती है। हालांकि, ऐसा है नहीं। लोजपा भी एनडीए में है। 2010 में वह राजद के साथ था। ऐसे में इस बार भागलपुर प्रमंडल में कुछ अलग होना तय है। दूसरी ओर राजद, कांग्रेस और रालोसपा के स्थानीय नेता मानकर चल रहे हैं कि उनकी पार्टियां मिलकर महागठबंधन के स्वरूप में ही चुनाव लड़ेंगी, पर सीट बंटवारे को लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है।
एनडीए का चुनावी गणित
भागलपुर जिले की चुनावी गणित को एनडीए के स्थानीय नेताओं की नजर से देखें तो शीर्ष स्तर पहला फॉर्मूला यह होगा कि जिस सीट पर जो जीता हुआ है वह उसका। भागलपुर जिले की सुल्तानगंज, नाथनगर और गोपालपुर सीट पर जेडीयू का कब्जा तीन टर्म से है। इस पर जेडीयू किसी कीमत पर अपना दावा नहीं छोड़ेगा। बाकी बची जिले की चार सीटों में 2010 के हिसाब से बंटवारा होगा। इसमें भागलपुर, बिहपुर और पीरपैंती सीट पर भाजपा लड़ेगी।
इस बार सीट बंटवारे में अगर जिले की एक सीट लोजपा को भी देनी पड़ी तो वह कहलगांव सीट पर दिख रही है। 2015 में जेडीयू की अनुपस्थिति में लोजपा को भागलपुर जिले की दो सीटों में नाथनगर और कहलगांव की ही सीट मिली थी। 2010 में राजद के साथ गठबंधन के दौर में लोजपा के हिस्से में भागलपुर सीट आई थी। तब यहां से लोजपा प्रत्याशी की जमानत जब्त हो गई थी।