बेरोजगारी को झुठला नहीं सकते....बिहार के पास और है क्या?
आईबीएम, एचसीएल समेत कई आईटी कंपनी में काम कर चुके राजेश चौधरी बिहार से ही हैं। शिक्षा-दीक्षा रांची, बोकारो, जमशेदपुर में हुई है। राजेश चौधरी आईटी एक्सपर्ट हैं और कहते हैं बिहार दिमागी रूप से देश की सबसे ज्यादा उपजाऊ भूमि है। राज्य देश को अच्छा अफसर, तकनीशियन, डाक्टर, गणितज्ञ, रिक्शा वाला, मजदूर, राजगीर, मिट्टी सब देता है। वहां कोई बड़ा उद्योग नहीं है, लेकिन बिहार के लोग जम्मू-कश्मीर से लेकर कन्या कुमारी तक बड़ी संख्या में अपनी सेवाएं देते हैं। राज्य के पास मानवबल द्वारा सर्विस देने की ही पूंजी और कोविड-19 संक्रमण काल में सबसे बुरा असर भी बिहार के इसी क्षेत्र पर पड़ा है। सभी मजदूर, खेतिहर, रिक्शावाले, मिलों में काम करने वाले घर लौट गए हैं। राजेश चौधरी कहते हैं कि सब संक्रमण का दंश झेल रहे हैं। इसलिए रोजगार इस चुनाव में बड़ा मुद्दा बन रहा है। राजेश चौधरी कहते हैं कि उन्हें बिहार चुनाव में मुकाबला कड़ा होने की उम्मीद दिखाई दे रही है।
नंबर के लिए लड़ेगी भाजपा और राजद
राजेश चौधरी को लग रहा है कि अभी बिहार विधानसभा चुनाव 28 अक्टूबर से पहले कई मोड़ लेगा। 23 अक्तूबर को प्रधानमंत्री की नीतीश कुमार के साथ जनसभा है। इसी दिन राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की संयुक्त जनसभा है। लोजपा के चिराग पासवान मैदान में उतर चुके हैं। राजेश चौधरी, राहुल त्रिपाठी और सर्वे एजेंसी के लिए काम करने वाले सूत्रों का मानना है कि इस चुनाव में जद(यू) का बड़ा नुकसान लोजपा के चिराग पासवान कर रहे हैं। सर्वे एजेंसी के सूत्र की मानें तो चिराग द्वारा अलग चुनाव लड़ने का फैसला लेने के बाद बदल रही परिस्थिति में भाजपा को भी लोजपा से कुछ नुकसान हो सकता है। वहीं लोकजनशक्ति पार्टी खुद भले बड़ी सफलता न पाए और दहाई के नीचे सिमटी रहे, लेकिन सबसे बड़ा फायदा राष्ट्रीय जनता दल और उसके नेता तेजस्वी यादव को पहुंचाती नजर आ रही है। ऐसे में हो सकता है चुनाव बाद सबसे अधिक विधायकों के दल को लेकर भाजपा और राजद में कड़ी टक्कर देखने को मिले।