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Bihar Election 2020: क्या तेजस्वी के कमाई, पढ़ाई, दवाई और सिंचाई के नारे ने पीएम मोदी और नीतीश के विश्वास को धो दिया?

Sat, 31 Oct 2020 07:02 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के कटआउट में बिहार के विकास, विश्वास और सुशासन की झलक
  • तेजस्वी दे रहे हैं बिहार में बदलाव का नारा
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राजद नेता तेजस्वी यादव (फाइल फोटो) - फोटो : Amar Ujala (File)
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विस्तार
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क्या बिहार विधानसभा-2020 के जरिए राज्य में बदलाव की हवा चल पड़ी है? ठेठ बिहारी तेजस्वी यादव का कमाई, पढ़ाई, दवाई, सिंचाई के नारे ने राज्य ने राज्य में यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री तथा सुशासन बाबू के नाम से मशहूर नीतीश कुमार के विश्वास को हिला दिया है? सवाल मौजूं है। दिलचस्प है कि अब संघ और भाजपा से जुड़े कार्यकर्ताओं का संदेह गहराने लगा है। बिहार में प्रथम चरण के मतदान के पूरा होने के बाद 30 अक्तूबर को बनारस लौटे संघ के कार्यकर्ता का कहना है कि मुंगेर की घटना ने बड़ा नुकसान पहुंचाया। संघ के सूत्रों  का कहना है कि इस बार विधायकों की संख्या में राष्ट्रीय जनता दल को बढ़त मिल सकती है और पहले नंबर पर चल रही भाजपा दूसरे नंबर पर आ सकती है।

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नीतीश कुमार की छवि को झटका

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ बिहार का दौरा करके लौटे सूत्रों के हवाले से भी इसी तरह के संकेत मिल रहे हैं। कुमारबाग, चंपारण, भितिहरवा, नरकटिया गंज. मोतिहारी, सासाराम, मुजफ्फरपुर, आरा, छपरा, पटना, राजगीर में चुनावी सर्वे की गरज से पिछले 15 दिन से टिके सूत्र भी बताते हैं कि राज्य में हवा बदल रही है। राष्ट्रीय जनता दल बड़े फायदे में जाता दिखाई दे रहा है, लेकिन अभी कहना मुश्किल है कि इससे एनडीए को कितना नुकसान होगा। क्योंकि राज्य में एनडीए (जदयू), भाजपा, हम और वीआईपी को कमतर नहीं कहा जा सकता। तेजस्वी यादव की लोकप्रियता में काफी इजाफा हुआ है। चिराग पासवान की छवि को भी लाभ हुआ है, लेकिन प्रधानमंत्री की लोकप्रियता भी लगातार बनी हुई है। हां, आम जनता के बीच में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की छवि को जरूर झटका लगा है।

कमाई, पढ़ाई, दवाई, सिंचाई और चढ़ावा

तेजस्वी यादव अपनी हर जनसभा में ज्यादा नहीं बोल रहे हैं। वह केवल सीमित और धारदार हमला बोल रहे हैं। तेजस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि से टकराने की बजाय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से टकराकर जनता में उनको लेकर फैली नाराजगी का लाभ समेटने में लगे हैं। हर जनसभा में उनकी स्टाइल ठेठ बिहारी से हो रही है। अब कमाई, पढ़ाई, दवाई, सिंचाई और चढ़ावा का मुद्दा उठा रहे हैं। कमाई से आशय लोगों को रोजगार देने, मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली ही कैबिनेट की बैठक में 10 लाख लोगों को रोजगार देने के प्रस्ताव पर दस्तखत करने से है। पढ़ाई का आशय विद्यालयों, स्कूलों, कालेजों, विश्वविद्यालयों में पढ़ाई, लिखाई और उन्हें खोले जाने से हैं। अस्पतालों में नियुक्ति, चिकित्सालयों में दवाई के साथ-साथ वह किसानों के लिए सुचारु सिंचाई व्यवस्था का आश्वासन दे रहे हैं। साथ में यह कहना नहीं भूलते कि ब्लाक, जिला, पुलिस थाना कहीं भी बिना चढ़ावे के लोगों का काम नहीं होता। यह कहकर तेजस्वी सुशासन बाबू की छवि पर सीधे हमला कर रहे हैं। दूसरी तरफ महागठबंधन ने चुनाव प्रचार में इसी तरह की रणनीति अपनाई है। पटना से लेकर पूरे बिहार में तेजस्वी यादव के बदलाव के लिए तैयार बिहार का पोस्टर, कटआउट लगा है। जनसभाओं में भीड़ उमड़ रही है और तेजस्वी दिन में लगातार कई जनसभाएं कर रहे हैं।

मोदी ने 2015 में की 31 जनसभाएं, इस बार केवल 12

भाजपा का प्रचार अभियान पूरी तरह से भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के भरोसे है। नड्डा लगातार राज्य में चुनाव अभियान पर नजर बनाए हुए हैं। हर दिन वह कई जनसभाएं कर रहे हैं। नड्डा के अलावा केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत केंद्रीय मंत्रियों नें चुनाव प्रचार अभियान को धार दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी बिहार में प्रचार व्यस्त है। स्वास्थ्यगत कारणों से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद से बिहार जाकर प्रचार को समय नहीं दे पाए हैं। हालांकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार के प्रचार अभियान की शुरुआत काफी पहले कर दी थी, लेकिन चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद उनकी केवल 12 जनसभाएं बिहार में प्रस्तावित हैं। वह केवल चार दिन बिहार में प्रचार के लिए उपलब्ध रहेंगे। इसके समानांतर 2015 में प्रधानमंत्री ने कुल 31 जनसभाओं को संबोधित किया था।

लालू राज की याद और तेजस्वी के अनुभव पर प्रहार ही नीतीश का हथियार

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार विधानसभा चुनाव में भरपूर समय दे रहे हैं। जद(यू) ने राज्य में राजनीतिक हवा को भांपने के लिए एजेंसियों की भी मदद ली है। जद(यू) के लिए प्रचार में लगे राजेश चौधरी का कहना है कि वामदलों और राष्ट्रीय जनता दल के दुष्प्रचार की वजह से ऐसा लग रहा है। दूर से देखने वालों को लग रहा है कि राष्ट्रीय जनता दल को इसका लाभ मिल सकता है, लेकिन मतगणना तक का इंतजार करना चाहिए। राजेश कहते हैं कि सरकार तो एनडीए की ही बनेगी। मुजफ्फरपुर के आईटी इंजीनियर पंकज सिंह पटना में डटे हैं। लॉकडाऊन के बाद बेंगलुरु छोड़कर बिहार में डटे पंकज का कहना है कि नीतीश कुमार ने बिहार को बहुत कुछ दिया है, लेकिन पिछले चार महीने में उनकी छवि को बड़ा झटका लगा है। पंकज कहते हैं मंच से नीतीश कोई नई बात नहीं बोल रहे हैं। वह या तो लालू प्रसाद यादव का जंगलराज गिना रहे हैं, या फिर तेजस्वी यादव के अनुभव, कामकाज की क्षमता, योग्यता पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। केवल इससे क्या हासिल होगा?
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क्या किंगमेकर बनने की तरफ हैं चिराग?

चिराग का एकतरफा प्यार भाजपा के साथ है। राजनीति के पंडित उन्हें बिहार में भाजपा की बी टीम तक कह रहे हैं और चिराग भाजपा पर कोई राजनीतिक हमला भी नहीं बोलते। चिराग और उनकी पार्टी के ऊपर भाजपा अध्यक्ष, प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री भी कोई हमला नहीं बोल रहे हैं। दूसरी तरफ चिराग की पार्टी के टिकट से संघ और भाजपा के करीब दो दर्जन नेता जद(यू) के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं। लोजपा अध्यक्ष अपनी हर जनसभा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का विरोध कर रहे हैं। लेकिन इसी के साथ वह राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव पर कोई हमला नहीं बोल रहे हैं। चिराग ने तेजस्वी को अपना छोटा भाई बताया है और उन्हें जीत की शुभकामना दी है। इसके अलावा चिराग लगातार कह रहे हैं कि 10 नवंबर को मतगणना पूरी होने के बाद राज्य में भाजपा-लोजपा की सरकार बनेगी। सीएसडीएस के साथ पिछले कई चुनाव अभियानों में काम कर चुके सूत्र का कहना है कि बिहार चुनाव ने चिराग के एनडीए से बागी होने के बाद ही करवट बदली है। पहले तो केवल नीतीश कुमार और एनडीए की हवा थी। अब कड़ा मुकाबला है।
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