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बिहार चुनाव में नेताओं पर भारी पड़ेंगे ये सवाल, जनता पूछेगी 'बोल बिहारी'

Sun, 11 Oct 2020 02:54 PM IST
Tanuja Yadav डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बिहार में चुनाव लड़ने वाले और उनके लिए प्रचार में उतर रहे नेताओं को इस बार जनता के तीखे सवालों का सामना करना पड़ सकता है। जनता सवाल पूछने के लिए तैयार हो रही है। चुनाव में जनता पूछेगी, 'बोल बिहारी' मुद्दा हमारा, बात हमारी'।

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देश में युवाओं के लिए रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार और विभिन्न आयोगों और बोर्डों की ओर से आयोजित परीक्षाओं का रिजल्ट समय पर आए, ऐसे मसलों पर आवाज बुलंद करने वाला 'युवा हल्ला बोल' संगठन अब 'बोल बिहारी' मुहिम शुरु करने जा रहा है।

युवा हल्ला बोल के संयोजक अनुपम बताते हैं कि 15 अक्तूबर को 'बोल बिहारी' का बिगुल फूंका जाएगा। संगठन का प्रयास है कि इस चुनाव में आम जनता का ध्यान भटकाने की बजाए बिहारियों के असल मुद्दों पर बातचीत हो। 'बोल बिहारी: मुद्दा हमारा, बात हमारी!' नारे के साथ 20 अक्तूबर से राज्यव्यापी यात्रा शुरु होगी।
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अनुपम के मुताबिक, देशव्यापी रोजगार आंदोलन का वाहक 'युवा हल्ला बोल' अब बिहार में एक सकारात्मक पहल की शुरुआत कर रहा है। 'युवा हल्ला बोल' कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है, बल्कि एक राष्ट्रीय युवा आंदोलन है। इतिहास गवाह है कि कई बड़े बदलाव की बयार बिहार से आई है।

देश में हर बड़े बदलाव का वाहक युवा ही हुए हैं। बिहार में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और कृषि से लेकर पर्यावरण जैसी व्यवस्था चरमराई हुई है। ऐसे में अगर हवा हवाई मुद्दों और दोषारोपण करके चुनाव के दौरान जनता का ध्यान भटका दिया गया तो इससे बड़ी शर्म की बात कुछ और नहीं हो सकती।

हर चुनाव सरकार के कामकाज की समीक्षा, पार्टियों का आंकलन और आगे की योजनाओं पर चर्चा करने का अवसर होता है, लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव पार्टियों और नेताओं की मौकापरस्ती और सिद्धान्तविहीनता तक सिमटती जा रही है। ऐसे में 'युवा हल्ला बोल' ने तय किया है कि बिहार चुनावों का आम जनता से सीधा सरोकार हो, बिहारियों के अपने मुद्दों पर बात हो और चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी इन सवालों पर अपना रुख स्पष्ट करें।

इसी के तहत 'बोल बिहारी: मुद्दा हमारा, बात हमारी!' नारे के साथ 15 अक्तूबर को मुहिम की शुरुआत की जाएगी। 'बोल बिहारी' दस्तावेज बिहार की दशा दिशा पर चुनाव लड़ रहे नेताओं और पार्टियों के सामने कुछ सवाल खड़े करेगा। इन्हीं सवालों में बिहार के नागरिकों विशेषकर युवाओं की मांग भी है।

इससे स्पष्ट हो जाएगा कि इन सवालों से बचने वाले प्रत्याशियों को बिहार और बिहारियों से कोई सरोकार नहीं है। 'बोल बिहारी' एक दस्तावेज़ भर नहीं बल्कि बिहार के चुनावी समर के बीचोबीच एक यात्रा का रूप लेगी। 15 अक्टूबर को पटना में प्रेस वार्ता कर दस्तावेज जारी किया जाएगा।

उन सवालों को सामने रखा जाएगा जो बिहार के हैं, बिहारियों के हैं। राजनीतिक विमर्श को जनता के असल मुद्दों पर लाने के लिए 20 अक्तूबर से राज्यव्यापी 'बोल बिहारी' यात्रा की शुरुआत होगी। यात्रा में 'युवा हल्ला बोल' के संयोजक अनुपम के साथ राष्ट्रीय परिषद के अतुल झा, अजित यादव, बिपिन कुमार, रजनीश झा, आदित्य कश्यप, झारखंड से ऋषव रंजन और अमरेंद्र सिंह, उत्तर प्रदेश से रजत यादव और गोविंद मिश्रा, बंगाल से अमन बाँका और अनुज बांका, दिल्ली से सुरिंदर कोहली समेत कई राज्यों से युवक युवतियों की भूमिका होगी।

बिहार के उन बेरोज़गार युवाओं ने भी 'बोल बिहारी' मुहिम में जोर शोर से भागेदारी करने का निर्णय लिया है जिनके सवालों को 'युवा हल्ला बोल' लगातार मजबूती से उठाता रहा है।

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