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मोदी की पुरानी टीम तैयार कर रही नीतीश का नया चेहरा

Sat, 13 Jun 2015 01:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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भले ही सियासत की डगर पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अलग-अलग ध्रुव पर खड़े दिखाई देते हों, मगर बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान ऐसा नहीं दिखेगा। दरअसल, बिहार चुनाव में नीतीश प्रचार के दौरान पीएम मोदी के अवतार में नजर आएंगे।
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मसलन, जिस तरह मोदी ने लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान देशभर में गुजरात के विकास मॉडल का डंका बजाया, ठीक उसी तरह नीतीश अपने कार्यकाल के सुशासन और विकास मॉडल का धुआंधार प्रचार करते दिखेंगे।

खास बात यह है कि नीतीश के चुनाव प्रचार का तानाबाना पीएम मोदी की वही पुरानी टीम बुन रही है, जिसने लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी के लिए अनूठा प्रचार अभियान छेड़ कर दुनिया भर में चर्चा बटोरी।
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नीतीश के प्रचार अभियान का खाका

लोकसभा चुनाव के दौरान ‘चाय पर चर्चा’ और मोदी का ‘3डी होलोग्राम’ कार्यक्रम तैयार करने वाली प्रशांत किशोर की टीम ने नीतीश के प्रचार अभियान की कमान संभाली है। किशोर ने 200 चुने हुए पेशेवरों की सहायता से नीतीश के प्रचार अभियान का खाका खींचा है। इसकी पहली कड़ी में ‘बढ़ चला बिहार’, ‘बिहार 2025’ अभियान की शुरुआत की है।

इसके तहत महज छह हफ्ते में चार करोड़ लोगों से सीधा संपर्क साधने की योजना है। टीम की सलाह मानते हुए नीतीश चुनाव प्रचार के दौरान अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाएंगे।

भावी योजनाएं गिनाने के अलावा वह न तो जाति आधारित राजनीति करने की कोशिश करते दिखेंगे और न ही किसी जाति विशेष के कार्यक्रम में शिरकत करेंगे।
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बिहार चुनाव में दिखेगा मोदी प्रचार स्टाइल

नीतीश पीएम मोदी की सियासत के धुर विरोधी हैं मगर चुनाव प्रचार के स्टाइल के नहीं। खासतौर पर उपलब्धियां गिनाने और भावी योजनाओं को मतदाताओं तक पहुंचाने के पीएम मोदी के तरीके ने उन्हें जरूर आकर्षित किया है।

जदयू सूत्रों के मुताबिक, नीतीश के लिए कमान संभाल चुके प्रशांत कुछ ऐसे तरीके अपना रहे हैं, जिससे बेहद कम समय में नीतीश सरकार की उपलब्धियां और भावी कार्यक्रम मतदाताओं तक पहुंचे।

जदयू सूत्रों के मुताबिक, भले ही राजद-जदयू के बीच चुनाव पूर्व गठबंधन पर अंतिम फैसला हो चुका है, मगर इसके बावजूद नीतीश अपनी अलग छवि और ब्रांड वैल्यू के प्रति सचेत दिखेंगे।

इस क्रम में लालू और नीतीश की चुनिंदा संयुक्त रैलियां ही होंगी। हालांकि दोनों दलों के बीच मतभेद न दिखे, इसके लिए दोनों दलों के दूसरे वरिष्ठ नेताओं की ताबड़तोड़ संयुक्त रैलियां आयोजित की जाएगी।
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