शिक्षा विभाग विद्यालयों में छात्र छात्राओं की पढ़ाई को लेकर जितनी सजग है उतनी ही सजगता से शिक्षकों पर भी ध्यान दे रही है। विभाग का मानना है कि अगर शिक्षक बच्चों को शिद्दत से पढ़ते हैं तो सरकार की भी यह जिम्मेदारी है कि उन्हें समय पर वेतन का भुगतान किया जाय, लेकिन जिला शिक्षा पदाधिकारियों की लापरवाही से कुछ जिलों के शिक्षकों के वेतन में बहुत विलंब हो रहा है। इस वजह से शिक्षकों ने विभाग में इस बात की शिकायत की है। इसी का नतीजा है कि शिक्षा विभाग ने बिहार के 5 जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारी पर कार्रवाई करने की अनुशंसा की है।
इन जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारी पर हुई है कार्रवाई
विभाग का कहना है कि कई जिला के जिला शिक्षा पदाधिकारी लगातार कर्मियों के वेतन/ मानदेय भुगतान करने में लापवाही बरत रहे हैं। इस बात को लेकर उन्हें बार-बार निर्देश दिया जा रहा है लेकिन वह अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं। उन जिलों में बांका, जमुई, पटना, सहरसा और सिवान जिला शामिल हैं, जहां के जिला शिक्षा पदाधिकारी लगातार विभाग के आदेशों की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं। शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को वेतन नहीं मिलने के लिए जिम्मेदार इन जिलों के डीईओ को माना है। विभाग के अपर सचिव ने इन सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की है। अपर सचिव संजय कुमार ने इस संबंध में निदेशक प्रशासन को पत्र लिखा है कि in जिला शिक्षा पदाधिकारियों पर विभाग अतिशीघ्र कार्रवाई करे।
जानिये क्या लिखा पत्र में
जिला शिक्षा पदाधिकारी के खिलाफ में अपर सचिव संजय कुमार ने पत्र लिखते हुए कहा है कि 15 तारीख को आयोजित बैठक में फिर से समीक्षा की गई, जिसमें यह पाया गया कि सहरसा और सीवान में विद्यालय सहायक, विद्यालय परिचारी और आधार ऑपरेटर का मानदेय भुगतान अब तक नहीं किया गया है। इसी तरह बांका में बीपीएमयू का मानदेय भुगतान नहीं किया गया है। जमुई में भी बीपीएमयू का मानदेय और आधार अपडेट ऑपरेटर का मानदेय भुगतान नहीं हुआ। और तो और पटना जिला में भी बीपीएमयू का मानदेय और आधार ऑपरेटर का मानदेय भुगतान नहीं किया गया। पूछे जाने पर सभी ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। इस स्थिति में इन सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी को बार-बार यह निर्देश दिया जाता है कि सभी कर्मियों का वेतन/ मानदेय भुगतान हर माह के पहले सप्ताह में कर दिया जाय, लेकिन ये लोग सुन ही नहीं रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि शिक्षा पदाधिकारियों की यह मनमानी नहीं चलेगी, अब उनपर कार्रवाई होगी।
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