भागलपुर रेलवे अस्पताल में शव वाहन की व्यवस्था है। रेलवे GRF को 5 हजार रुपये दे देती है कि आप डेड बॉडी को शव वाहन पर लाद कर ले जाइए, अगर वह लावारिस है तो उसका अंतिम संस्कार करवाए।
सरकार हर सरकारी अस्पताल में शव वाहन देने का दावा करती है लेकिन आज भी कई जगह ठेले पर शव लदे हुए दिखते हैं। ऐसी ही तस्वीर भागलपुर से सामने आई है। यहां पर रेलवे अस्पताल के बाहर से ठेला पर शव को ले जाते हुए दो लोग जाते दिख रहे हैं। जांच करने पर पता चला कि यह दोनों ठेला पर शव लादकर कहीं और नहीं बल्कि पोस्टमार्टम हाउस जा रहे थे। पूछने पर पता चला कि यह शव अज्ञात था। इसे कोई देखते वाला नहीं था। प्रशासन के कहने पर पोस्टमार्टम के लिए जा रहे थे।
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शव को देखने वाला तक कोई नहीं
हालांकि, इस शव के साथ रेलवे स्वास्थ्य विभाग न कोई कर्मचारी थे और न ही अधिकारी। शव को इनदोनों के अलावा कोई देखने वाला नहीं था। ठेला से शव लेकर पोस्टमार्टम हाउस जाने वाले युवक की पहचान उत्तर प्रदेश निवासी कृष्ण कुमार के रूप में हुई। वह भागलपुर में ही रहता है और ठेला चलाकर गुजर बसर करता है। पूछने पर उसने बताया कि रेलवे के स्वास्थ्य विभाग में शव वाहन नहीं है। इसलिए हमलोग को ठेला पर शव को इस तरह से पोस्टमार्टम के लिए ले जाना पड़ता है। इसके बदलने हमें दो पैसे हमें मिल जाता है।
GRF को शव वाहन के लिए 5 रुपये देती है रेलवे
मालदा डिवीजन की पीआरएम रूपा मंडल ने कहा कि भागलपुर रेलवे अस्पताल में शव वाहन की व्यवस्था है। रेलवे GRF को 5 हजार रुपये दे देती है कि आप डेड बॉडी को शव वाहन पर लाद कर ले जाइए, अगर वह लावारिस है तो उसका अंतिम संस्कार करवाए। ऐसे में अगर GRF शव वाहन क्यों नहीं उपलब्ध करवा रही है तो इसकी हमलोग जांच करवाएंगे। रेलवे की टीम इस मामले को गंभीरता से ले रही है। राशि देने के बावजूद अगर शव वाहन की व्यवस्था नहीं करवाई जा रही है तो इस पर कार्रवाई होनी तय है।