बिहार में लचर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर लोग खासे चिंतित रहते हैं, लोग ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि उन्हें अस्पताल जाने की नौबत नहीं आए, फिर भी सैकड़ों लोगों को बेहतर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचना पड़ता है, खासकर कोरोना काल में तो राज्य में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी लोगों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी है।
अस्पतालों की संख्या कम होने की वजह से लोग इलाज के अभाव दम तोड़ दिए। इस सबके बीच पहली बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जिगरी दोस्त नरेंद्र कुमार सिंह ने अपने मित्र से गांव में वर्षों पुराने बंद पड़े स्वास्थ्य केंद को चालू करवाने का आग्रह किया है।
स्वास्थ्य केंद्रों पर ध्यान देने की अपील
दरअसल, सहरसा के मैना गांव में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र वर्षों से बंद पड़ा है । इससे स्वास्थ्य केंद्र पर ना तो डॉक्टर हैं, ना नर्स और नहीं दवाइयां मिलती है। स्वास्थ्य केंद्र खंडहर में तब्दील हो चुका है। देखरेख के अभाव में भवन की दीवारों में दरारें आने लगी हैं। छत का कुछ हिस्सा भी गिरने लगा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कॉलेज साथी नरेंद्र कुमार सिंह इसी गांव के रहने वाले हैं। गांव में बंद पड़े स्वास्थ्य केंद्र को लेकर नरेंद्र कुमार सिंह ने अपने मुख्यमंत्री दोस्त से अपील की है कि उनके गांव समेत बिहार में जितने भी स्वास्थ्य केंद्र बंद पड़े हैं उन सब को चालू करवाया जाए।
कोरोना की दूसरी लहर ने अस्पतालों पर बढ़ाया दबाव
बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर ने बिहार में भी जमकर कहर बरपायी है। मई की शुरुआत में कोरोना के हर रोज 8 से 9 हजार नए मामले सामने आ रहे थे. जबकि सैकड़ों लोगों की मौत हो रही थी, इस दौरान सरकारी और निजी अस्पतालों पर भारी दबाव था। ग्रामीण क्षेत्रों से भी लोग बड़ी संख्या में शहर के अस्पतालों में भर्ती हो रहे थे। नीतीश कुमार के मित्र नरेंद्र कुमार सिंह ने मीडिया को बताया कि अगर गांवों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का कायाकल्प हो जाता तो लोग शहरों के अस्पतालों में रुख नहीं करते।