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Bihar caste census : नीतीश के संसदीय कार्य मंत्री बोले- हम कानून बनाएंगे, मगर पटना हाईकोर्ट ने सब कह दिया था

Fri, 12 May 2023 06:24 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

बिहार सरकार ने मंत्री संजय झा ने कहा- हाईकोर्ट में कौन-कौन लोग इसके पीछे हैं। यह सब लोग जानते हैं। जाति गणना कराने के लिए मुख्यमंत्री प्रतिबद्ध हैं। इस मामले को लेकर बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट गई है। इसमें जो भी कुछ करना होगा, वह सारा काम बिहार सरकार करेगी।
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जातीय जनगणना को लेकर बिहार सरकार ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जाति जन-गणना पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के बाद बिहार सरकार के मंत्री विजय चौधरी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जाति गणना कराने के लिए  बिहार सरकार और हमारे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हर हाल में जाति गणना के कार्य को पूरा करना चाहते हैं। अगर आवश्यकता पड़ी तो कानून भी बनाने पड़ेंगे। जो भी वैधानिक उपाय होंगे, वह बिहार सरकार करेगी। वहीं जल संसाधन और सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री संजय कुमार ने भी जातीय गणना के सवाल पर बयान दिया है। 

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मंत्री संजय झा बोले- जाति गणना कराने के लिए मुख्यमंत्री प्रतिबद्ध
मंत्री संजय झा ने कहा कि जाति जनगणना के सवाल पर जदयू के सूचना एवं जनसंपर्क और जल संसाधन मंत्री संजय झा ने सफाई दी उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट में कौन-कौन लोग इसके पीछे हैं। यह सब लोग जानते हैं। जाति गणना कराने के लिए मुख्यमंत्री प्रतिबद्ध हैं। इस मामले को लेकर बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट गई है। इसमें जो भी कुछ करना होगा, वह सारा काम बिहार सरकार करेगी। जब यह हो रहा था तो उसमें मुख्यमंत्री समेत अन्य सभी पार्टी के लोग थे। सब लोगों ने सहमति दी थी कि यह एक जरूरी कदम है। इसके माध्यम से विकास के पैरामीटर को तय करने में काफी सुविधा मिलेगी। यह तो डाटा कलेक्शन है। इस माध्यम से डाटा कलेक्ट किया जा रहा है। यह काम पहली बार नहीं हो रहा है। इससे पहले यह काम काम हो चुका है। जब यूपीए की सरकार थी, तब यह काम किया गया था। यह केवल कास्ट का डाटा ही नहीं इसमें आर्थिक स्थिति का भी सर्वेक्षण किया जा रहा है। जाति गणना करवाने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार प्रतिबद्ध हैं, इसके लिए जो भी करना होगा वह बिहार सरकार करेगी।

 

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मीडिया से बातचीत करते बिहार सरकार के मंत्री संजय झा। - फोटो : अमर उजाला
अब जानते हैं हाईकोर्ट ने क्या कहा था...
दरअसल,  9 मई को केस के डेट की सुनवाई के लिए सरकार किन बिंदुओं पर तैयारी कर रही है, उसे समझने के लिए 'अमर उजाला’ ने विधि विशेषज्ञों से अंतरिम आदेश पर बात की। पाराग्राफ 21 से 31 तक को समझें तो सब साफ है। इसमें कहा गया था कि  भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के लिस्ट-1  की 69 वीं इंट्री census है। इसमें स्पष्ट है कि इससे संबंधित कानून बनाने का अधिकार सिर्फ संसद को है। राज्य को लिस्ट-2 पर नियम या कानून बनाने का अधिकार है। जनगणना कराने का अधिकार भारतीय संसद में निहित है।  इसमें 17 तरह की जानकारी लेने वाला प्रारूप रखा गया, जिसमें 'जाति' भी एक है। परिवार के सदस्य की जाति और आमदनी की जानकारी परिवार के मुखिया से लेनी है, न कि व्यक्ति विशेष से। यह अपने आप में इस डाटा की सच्चाई को संदेहास्पद बना देता है। यानी, व्यक्ति की स्वैच्छिक जानकारी प्राप्त नहीं हो रही है।  कोर्ट ने कहा कि विधानमंडल के दोनों सदनों द्वारा सर्वसम्मति से सर्वे कराने के संकल्प के बाद अगर कैबिनेट से भी सहमति हो चुकी थी तो यह समझ से बाहर है कि कानून बनाने में सक्षम विधानमंडल ने ऐसा क्यों नहीं किया? सरकार के इस जवाब से भी कोर्ट सहमति नहीं कि यह विलंब से लाया गया वाद है, क्योंकि यह जनता के हित से जुड़ी याचिका है। कोर्ट ने कहा कि हम इस बात से संतुष्ट हैं कि जिस तरह से सर्वेक्षण किया जा रहा है, वह राज्य के लिए निर्धारित नीति के तहत नहीं है।
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