बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने एक बार फिर तेजस्वी यादव समेत लालू परिवार के खिलाफ एलान-ए-जंग करते हुए लगातार दूसरे दिन प्रेस कांफ्रेंस किया। इस बार उन्होंने दूसरे फ्लैट का डिटेल दिया। उन्होंने कहा कि चार लाख रुपये में दिल्ली में 150 करोड़ का बंगला खरीदना सिर्फ लालू परिवार के उसी लाल के लिए संभव है, जिसके पास न पैतृक संपत्ति हो और न रोजगार से कमाने का कोई साधन। चार लाख में 150 करोड़ की संपत्ति खरीदना चमत्कार है और यह चमत्कार भ्रष्टाचार का काेरा प्रमाण है। सुशील मोदी ने कहा कि तेजस्वी यादव 750 करोड़ के IRCTC घोटाले में चार्जशीटेड और जमानत पर रहे व्यक्ति को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को उप मुख्यमंत्री पद से बर्खास्त कर देना चाहिए। 29 साल की उम्र में 52 से ज्यादा अवैध संपत्तियों के मालिक बने तेजस्वी यादव को सीबीआई ने 25 मार्च को पूछताछ के लिए बुलाया है और वह विधानमंडल सत्र का हवाला देकर पूछताछ से बचना चाह रहे हैं। भ्रष्टाचार के ऐसे आरोपी व्यक्ति को डिप्टी सीएम कैसे बनाए रखा जा सकता है?
पूर्व उप मुख्यमंत्री ने वर्तमान डिप्टी सीएम का खोला चिट्ठा
राज्यसभा सांसद और बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा- "
कल हमने जिस मकान का जिक्र किया था, उस मकान में दो कंपनियों का मुख्यालय है। यह मकान A B export private limited कंपनी के नाम है और इसके मालिक हैं बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव। तेजस्वी यादव ने ना तो आज तक कभी कोई नौकरी की है और न ही कोई व्यापार किया, इसके बावजूद वह डेढ़ सौ करोड़ की संपत्ति के मालिक बन बैठे हैं। इतनी बड़ी संपत्ति उन्होंने मात्र ₹4 लाख में हासिल की है। यह मकान D1088 की कीमत आज डेढ़ सौ करोड़ है। यह वही मकान है, जिसमें अभी तेजस्वी अपनी पत्नी के साथ ठहरे हुए थे और जहां ईडी ने पूछताछ की थी। इस कंपनी का कोई टर्नओवर नहीं है। कोई कंपनी व्यापार करने के लिए बनती है। कंपनी में नफा-नुकसान होता है, उसका टर्नओवर होता है, लेकिन इस कंपनी का ना तो कोई टर्नओवर है और न ही यह कोई व्यापार करती है। इसमें तो कोई कर्मचारी भी नहीं। इस कंपनी ने मात्र इनके लिए संपत्ति बनाने का काम किया।"
लालू परिवार की इस कंपनी में भागीदारी बताई सुमो ने
राज्यसभा सांसद मोदी ने कहा- "A B export private limited के 97 फ़ीसदी शेयर को मात्र ₹4लाख में खरीदा गया। इसके शेयर का 3% लालू प्रसाद जी की एक बेटी चंदा यादव का है। यह कंपनी 1996 में स्थापित हुई, लेकिन इस कंपनी में सिर्फ एक ही काम किया और वह यह कि इसने तेजस्वी यादव के लिए मकान खरीदने का काम किया। शुरुआती समय में इस कंपनी के डायरेक्टर तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, चंदा यादव और रागिनी यादव थे। कंपनी का डायरेक्टर कोई भी हो सकता है, लेकिन शेयर होल्डर हर कोई नहीं बन सकता है। जो शेयर खरीदेगा, वही शेयर होल्डर बनेगा। यानी इस कंपनी के डायरेक्टर भी लालू के परिवार के ही लोग थे और शेयर होल्डर भी वही लोग थे। वर्तमान में इस कंपनी के डायरेक्टर में रागिनी और लालू यादव का नाम है। एक दूसरे डायरेक्टर लालू के विश्वस्त सीवान बड़हरिया निवासी शरीकल बारी हैं।"
दिल्ली के मकान को कैसे खरीदा गया, यह भी बताया
सुशील मोदी ने बताया- "2007-08 में फ्रेंड्स कॉलोनी में जमीन के साथ इस मकान को 5 करोड़ में खरीदा गया। एबी एक्सपोर्ट कंपनी के लिए इसका भुगतान मुंबई के पांच हीरा व्यापारियों ने किया। एक-एक करोड़ का ऋण बगैर ब्याज के लालू परिवार की कंपनी को देने वाली कंपनियां फर्जी पायी गईं। 15 साल में न तो यह पांच करोड़ लोन वापस किए गए और न हीरा व्यापारियों ने अपने पैसे वापस मांगे। 2007-08 में जमीन की कीमत चार करोड़ 54 लाख और मकान की कीमत 45 लाख दिखाई गई। जिस समय यह संपत्ति खरीदी गई, उस समय रेल मंत्री लालू प्रसाद थे। सवाल यह भी है कि आखिर प्रेमचंद गुप्ता, ओम प्रकाश कात्याल जैसे व्यापारियों ने अपनी कंपनी लालू परिवार को क्यों सौंप दी? वर्ष 2014-15 में कंपनी ने पुराने मकान को तोड़कर चार मंजिला आलीशान मकान 3.68 करोड़ में बना दिया। फिर 2017-18 में तेजस्वी यादव ने 4.10 करोड़ और चंदा यादव ने एक करोड़ रुपये इस कंपनी को कर्ज दिया, हालांकि इसका जिक्र तेजस्वी यादव की संपत्ति की घोषणा में नहीं है। आज इसकी कीमत 150 करोड़ है। डेढ़ सौ करोड़ की संपत्ति कुछ साल पहले इतने कम में कैसे खरीदी और बनाई गई, यह भी जांच का विषय है।"