बक्सर के रघुनाथपुर रेल हादसे में जो यात्री हादसे का शिकार हुए और गंतव्य तक जा नहीं पाए या बीच में ही फंस गए। उन यात्रियों को ऑटो वालों ने ब्लैकमेल करने में कोई कसर नहीं छोड़ा। रघुनाथपुर से आरा आने के लिए महज 50 किलोमीटर की दूरी पर एक हजार रुपये तक किराया वसूले।
यात्री बेबस, लाचार बीच मंझधार में फंसे थे। उन्हें किसी ऐसे जगह जाना ही था, जहां से उनके मंजिल तक जाने के लिए ट्रेन मिल जाए। ऐसे में सभी पीड़ित यात्रियों को लोग यही सुझाव दे रहे थे कि आरा स्टेशन चले जाइए, वहां से आपको आगे जाने के लिए कोई न कोई व्यवस्था करा दिया जायगा।
ऐसे में यात्री जब इस आपदा से बाहर निकले तो ऑटो ही एक सहारा था, जिससे वो आरा तक पहुंच सकते थे। लेकिन ऑटो वाले मनमाना किराया वसूलने में जुट गए। नार्थ ईस्ट ट्रेन में सवार जीतन शर्मा ने बताया, हमको किशनगंज जाना था। लेकिन बीच में ये हादसा हो गया तो ऑटो से आरा स्टेशन तक आए। मेरे साथ तीन और लोग थे, हमसे ऑटो वाले ने एक हजार रुपया किराया लिया तो आरा स्टेशन तक पहुंचाया। अब आगे जाने के लिए रात से ही ट्रेन का इंतजार कर रहे हैं।
आरा स्टेशन पर भीड़भाड़ की स्थिति
रघुनाथपुर के बाद आरा ही बड़ा स्टेशन है, जिसके वजह से हजारो यात्री और यात्रियों के शुभचिंतक जैसे-तैसे आरा स्टेशन पर पहुंचे। लेकिन आरा स्टेशन पर यात्रियों के लिए कोई खास व्यवस्था नहीं की गई थी। हादसा लगभग नौ बजे हुआ। जैसे-तैसे यात्री 12 बजे रात से ही आरा स्टेशन पहुंचने लगे और सुबह तक 500 से ज्यादा यात्री आरा स्टेशन पर थे। किसी को किशनगंज जाना था, किसी को पटना, जलपाईगुड़ी और गुवाहाटी इत्यादि जगहों पर जाना है। लेकिन आरा स्टेशन पर कोई खास व्यवस्था नहीं हुई। हालांकि, कुछ ट्रेन सासाराम रूट से डाइवर्ट होकर आरा स्टेशन आई, जिसमें तेजस, लोकमान्य तिलक, कैपिटल एक्सप्रेस और दो पैसेंजर ट्रेन को आरा से खोला गया।