ये तीनों राज्य के मुख्य दल हैं। इसमें भाजपा-जदयू में गठबंधन होने और भाजपा को वीआईपी तो जदयू को हम को अपने हिस्से की सीटें देने से इनके लिए सीटों की संख्या कम बची है। इसके अलावा चूंकि दोनों दलों ने पिछला चुनाव अलग-अलग लड़ा था।
इसलिए इन दोनों दलों के करीब-करीब हर सीट पर दावेदार हैं, जबकि इनके अपने हिस्से में महज 115 और 110 सीटें ही मिली हैं। जाहिर तौर पर करीब सौ सीटें ऐसी हैं जहां कई दावेदार टिकट का इंतजार कर रहे थे। इसी प्रकार राजद को वाम दलों और कांग्रेस से समझौते के कारण महज 144 सीटें मिली हैं और जो सीटें सहयोगियों के कोटे में गई हैं उन सीटों पर पार्टी के दावेदार खफा हैं।
इसलिए देरी से जारी कर रहे सूची बागियों के सामने विकल्प की भरमार ही वह कारण है जिसके चलते ये दल उम्मीदवारों की सूची बहुत देरी से जारी कर रहे हैं। जदयू-भाजपा और राजद ने पहले चुपचाप उम्मीदवारों को सिंबल बांटा। अंतिम समय में सूची जारी की। वह भी मुख्यत: पहले चरण की। कांग्रेस अब तक पहले चरण की सारी सीटें भी नहीं बांट पाई है।
इस बीच राज्य में दो गठबंधनों के मेल ने भी बागियों का ध्यान खींचा है। पहले एआईएमआईएम और एसजेडी ने तो रालोसपा-बसपा ने अलग-अलग गठबंधन की घोषणा की थी। अब ये दोनों गठबंधन एक हो गए हैं। जाहिर तौर इसमें शामिल दल विचारधारा के हिसाब से महागठबंधन के करीब रहे हैं। ऐसे में भविष्य में राजद की अगुवाई वाले महागठबंधन के बागी नेता इस गठबंधन की ओर रुख कर सकते हैं।
लोजपा का लक्ष्य, जदयू को नुकसान
अब लोजपा की राजनीति साफ होती जा रही है। लोजपा अपने उम्मीदवार वहीं उतार रही है जहां राजग की तरफ से जदयू मैदान में है। साफ है जहां भाजपा नहीं है वहां भाजपा का नेता लोजपा की तरफ से चुनावी मैदान में है। जाहिर है इससे भाजपा का आधार वोट बंटेगा और जदयू को मिलने वाले वोट का नुकसान होगा। मतलब ये है कि एक किस्म से भाजपा की तो मदद हो जाएगी लेकिन जदयू को टक्कर मिलेगी।
गठबंधन की स्थिति बुधवार तक साफ हुई है, इसलिए बगावत में तेजी नहीं देखी जा रही। चूंकि मुख्य दलों और गठबंधनों ने टिकट वितरण के मामले में खुद को प्रथम चरण के चुनाव तक ही सीमित रखा है, इसलिए बागियों की निगाहें दूसरे और तीसरे चरणों की सूची पर है। दलों की उम्मीदवारों की दूसरी-तीसरी सूची जारी होने के साथ-साथ बगावत में तेजी आना तय है।
लोजपा में भी बगावत, सुनील पांडे ने पार्टी छोड़ी
लोक जनशक्ति पार्टी ने अपने उम्मीदवारों के नाम फाइनल करने शुरू कर दिए हैं। सीटों पर उम्मीदवार घोषित करने की आधिकारिक घोषणा की बजाए अब तक कई सीटों पर पार्टी चुनाव निशान बांट चुकी है। लोजपा में जहां भाजपा के ज्यादातर बागी शामिल हुए हैं, वहीं दूसरों की बगावत का फायदा उठाने वाली लोजपा को भी अपनी पार्टी में बगावत झेलनी पड़ रही है। लोजपा नेता सुनील पांडे ने मंगलवार की रात पार्टी से इस्तीफा दे दिया। अब वह तरारी से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे।