सन 1990 के दशक में बिहार की राजनीति में दागियों का जबर्दस्त प्रभाव रहा। बाद में राजनीतिक दलों ने दागियों से किनारा करने की कोशिशें तो कीं, लेकिन वो दिखावे भर की रहीं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की रोशनी में चुनाव आयोग की सख्ती के बाद इस बार सियासी दल दागियों से बचने की कोशिश करते दिख रहे हैं।
जिस अनंत को लालू ने जदयू से निकलवाया, तेजस्वी ने अपनाया
लगता है 2015 में बाढ़ के पुटूस यादव की हत्या का गुस्सा राजद भूल गया है और बाहुबली अनंत सिंह को अपना लिया है। पुटूस की हत्या का आरोप अनंत सिंह पर लगा था और तब वह जदयू में थे। इस घटना से लालू प्रसाद इतने नाराज हुए कि सरकार बचाने के लिए नीतीश कुमार ने अनंत सिंह को जदयू से बाहर कर दिया।
इस बार राजद ने उसी अनंत सिंह को मोकामा से अपना उम्मीदवार बनाया है। अनंत सिंह फिलहाल जेल में बंद हैं। तेजस्वी यादव ने भी 2018 में अनंत सिंह को बैड एलिमेंट कहा था। वहीं जदयू ने अमरपुर से दागी जनार्दन के बेटे जयंत राज को अपना उम्मीदवार बनाया है। जनार्दन पर कई आपराधिक मामले लंबित हैं।
टिकट बंटवारे में परिवारवाद से कोई भी दल बचता नहीं दिख रहा है। राजद और जदयू में टिकट बंटवारे में नेताओं के बेटों-बहुओं और पत्नियों का पूरा ख्याल रखा गया है। दोनों दलों ने अपने-अपने दलों के दागियों और पुराने नेताओं के परिजनों को उम्मीदवार बनाया है।
राजद ने जिन्हें चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिया है, उनमें प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के बेटे सुधाकर सिंह को रामगढ़, शिवानंद तिवारी के बेटे राहुल तिवारी को शाहपुर, पूर्व केंद्रीय मंत्री कांति सिंह के बेटे ऋषि सिंह को ओबरा से और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयप्रकाश यादव की बेटी दिव्या प्रकाश को तारापुर व भाई विजय प्रकाश को चकाई से उम्मीदवार बनाया गया है।
जाहिर ने बड़े नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट देने के साथ-साथ जातीय समीकरण भी साधा है। मुस्लिम-यादव गठजोड़ के अलावा बिहार की राजनीति में अरसे से कद्दावर रहे अगड़ी जाति के अपनी ही पार्टी के कद्दावर नेताओं के रिश्तेदारों को मैदान में उतारा है। इससे अगड़े मतदाताओं में छाप छोड़ने की भी कोशिश की गई है।
इसी तरह जदयू और राजद के उम्मीदवारों में अति पिछड़ा वर्ग का दबदबा साफ दिख रहा है। दोनों दलों ने अल्पसंख्यक तबके को टिकट के मामले में भी अल्पसंख्यक ही बनाए रखा है। दलित उम्मीदवारों को सिर्फ आरक्षित सीट पर ही मौका दिया गया है।
भाजपा की सीटों पर जदयू ने उतारे उम्मीदवार
जदयू ने पहले चरण में ही भाजपा की चार सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। इसके साथ ही पार्टी ने भाजपा की दावे वाली सासाराम, दिनारा, झाझा और सूर्यगढ़ा सीटें अपने कोटे में रख ली हैं। सासाराम तो भाजपा की परंपरागत सीट मानी जाती है।