Bihar Assembly Election 2020: बिहार में दूसरे चरण के तहत 94 विधानसभा सीटों पर मतदान हो रहा है। इस बीच राजनीतिक दल तीसरे चरण की तैयारियों में लगे हुए हैं। वहीं, एडीआर ने उन प्रत्याशियों का लेखा-जोखा सार्वजनिक किया है, जो तीसरे चरण में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इस रिपोर्ट में जानते हैं कि तीसरे चरण में कुल कितने प्रत्याशी दागी हैं? किस राजनीतिक दल ने कितने दागी उम्मीदवारों को टिकट दिया? साथ ही, उन पर किस-किस तरह के मामले दर्ज हैं। एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार चुनाव के तीसरे चरण में कुल 1204 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें 1195 प्रत्याशियों ने अपनी संपत्ति, शिक्षा और आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी दी है। इसके मुताबिक, 1195 में से 371 प्रत्याशियों यानी 31 प्रतिशत उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। वहीं, 24 प्रतिशत प्रत्याशी गंभीर आपराधिक अपराधों में नामजद हैं, जिनकी कुल संख्या 282 है। आपको बता दें कि ये सभी जानकारी प्रत्याशियों के घोषणा पत्र के आधार पर हैं।
भाजपा-कांग्रेस में सबसे ज्यादा दागी!
एडीआर की रिपोर्ट की मानें तो सभी राजनीतिक दलों में दागी उम्मीदवारों की भरमार है। आंकड़ों की बात करें तो भाजपा और कांग्रेस में सबसे ज्यादा 76 प्रतिशत उम्मीदवार दागी हैं। यानी कि भाजपा के 34 में से 26 प्रत्याशियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। कांग्रेस के 25 में से 19 प्रत्याशियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। राजद के 44 में 32 प्रत्याशियों के साथ आंकड़ा 76 प्रतिशत, लोजपा के 42 में से 18 प्रत्याशियों के साथ आंकड़ा 43 प्रतिशत है। इसी तरह बसपा के 19 में से 5 उम्मीदवार और जदयू के 37 में से 21 उम्मीदवार दागी हैं। इन सभी के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं।
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गंभीर आपराधिक मामलों में भाजपा-राजद प्रत्याशी आगे
प्रत्याशियों के घोषणा पत्र के मुताबिक, तीसरे चरण में मैदान में उतरने वालों में भाजपा के 34 में से 22 उम्मीदवारों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। दूसरे नंबर पर कांग्रेस है, जिसके 25 में से 11 उम्मीदवारों के खिलाफ गंभीर क्रिमिनल केस दर्ज हैं। लोजपा के 42 में से 11, जदयू के 37 में से 11 और बसपा के 17 में से 4 उम्मीदवार इस लिस्ट में शामिल हैं।
इतने उम्मीदवारों पर दर्ज हैं महिला संबंधी आपराधिक मामले
एडीआर की रिपोर्ट में बताया गया है कि कुल 37 उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ महिला संबंधित आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी दी है। इनमें से 5 प्रत्याशियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 के तहत केस दर्ज होने की बात सामने आई है।
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73 उम्मीदवारों पर दर्ज हैं हत्या के प्रयास के मामले
बता दें कि तीसरे चरण में ताल ठोंक रहे कुल 1195 उम्मीदवारों में 73 के खिलाफ आईपीसी की धारा 307 के तहत हत्या के प्रयास के मामले दर्ज हैं।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश दरकिनार
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने उन उम्मीदवारों को टिकट नहीं देने का निर्देश दिया था, जिनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके बावजूद राजनीतिक दलों पर कोई फर्क नहीं पड़ा। सभी प्रमुख दलों ने बिहार चुनाव के तीसरे चरण के लिए 26 से 76 प्रतिशत दागी उम्मीदवारों को टिकट बांटे हैं। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 13 फरवरी 2020 को सभी राजनीतिक दलों को खासतौर पर निर्देश दिए थे कि उन्हें आपराधिक मामलों में संलिप्त प्रत्याशियों का चयन करने का कारण बताना होगा। साथ ही, यह भी स्पष्ट करना होगा कि बिना आपराधिक छवि वाले व्यक्तियों को क्यों नहीं चुना गया?