बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर शुक्रवार को दिशानिर्देश जारी हो सकता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी कहा है कि सितंबर में चुनाव की तारीखों का एलान हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, राज्य में 2-3 चरणों में चुनाव कराए जा सकते हैं। चुनाव आयोग ने पहले ही साफ कर दिया है कि चुनाव तय समय पर ही होंगे। 2015 में विधानसभा चुनाव की घोषणा नौ सितंबर को हुई थी। उस दौरान बिहार में छह चरणों में चुनाव हुए थे। वहीं, चुनाव से पहले राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। सभी दलों में जोड़-तोड़ और मान-मनौव्वल का दौर जारी है। आइए एक नजर डालते हैं पिछले दिनों हुई सियासी उठापटक पर...
फिर लालू के साथ हुए श्याम रजक
रविवार को पार्टी और मंत्रिमंडल से निकाले जाने के बाद सोमवार को श्याम रजक ने बयान जारी कर नीतीश सरकार पर निशाना साधा। रजक ने कहा कि जेडीयू में लगभग 99 फीसदी लोग सीएम नीतीश कुमार से नाराज हैं, लेकिन निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। मैं दूसरों के बारे में नहीं जानता, लेकिन मैं राष्ट्रीय जनता दल में शामिल हो रहा हूं।
श्याम रजक को रविवार को नीतीश कुमार ने उद्योग मंत्री के पद से हटा दिया था और जेडीयू से भी निष्कासित कर दिया था। जेडीयू से निकाले जाने के बाद श्याम रजक तेजस्वी यादव की उपस्थिति में राजद में शामिल हो गए।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जीतन राम मांझी की घर वापसी को लेकर जेडीयू की तरफ से पिछले कई महीनों से कवायद चल रही है। जेडीयू चाहती है कि मांझी की पार्टी 'हम' का पूरी तरह से जेडीयू में विलय हो जाए, लेकिन ऐसा नहीं होने की सूरत में मांझी की पार्टी के साथ कुछ सीटों पर समझौते का फॉर्मूला तय किया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार को हुई 'हम' की कोर कमेटी बैठक में महागठबंधन से अलग होने का फैसला कर लिया गया है।हालांकि, अभी तय नहीं हुआ है कि जीतन राम मांझी की पार्टी जेडीयू से हाथ मिलाएगी या नहीं।
मांझी के बदले राजद ने उतारी दलित नेताओं की फौज
जीतन राम मांझी के राजद से अलग होने के बाद मांझी फैक्टर को तितर-बितर करने के लिए राजद ने अपने दलित नेताओं की पूरी फौज मैदान में उतार दी है। इस तरह से जेडीयू-राजद के बीच दलित मतों को लेकर शह-मात का खेल शुरू हो गया है।
गुरुवार को राजद ने श्याम रजक, उदय नारायण चौधरी, रमई राम समेत अन्य तीन दलित दिग्गज नेताओं के जरिए प्रेस कॉन्फ्रेंस कराकर जेडीयू को यह संकेत दे दिया है कि मांझी के जाने से उनकी राजनीति पर कोई असर नहीं पड़ा है। श्याम रजक, उदय नारायण चौधरी और रमई राम बिहार में दलित राजनीति का चेहरा माने जाते हैं।
गौरतलब है कि एक दौर में इन्हीं तीन चेहरों के सहारे नीतीश कुमार सूबे में दलित मतों को साधने का काम किया करते थे। ये तीनों नेता अब जेडीयू का साथ छोड़ चुके हैं और राजद की तरफ से सियासी मैदान में मोर्चा संभाल रहे हैं। उदय नारायण चौधरी ने कहा, 'डबल इंजन की सरकार में दलित-पिछड़ों पर सबसे ज्यादा अत्याचार हुआ है। इस सरकार में दलित और आदिवासी छात्रों की छात्रवृत्ति बंद कर दी गई। बिहार में शराबबंदी कानून के तहत 70 हजार दलितों पर केस दर्ज हुआ।'
रमई राम ने कहा कि 'नीतीश सरकार ने दलितों का दलित और महादलित के रूप में बंटवारा किया जो किसी सरकार ने नहीं किया। नीतीश सरकार में दलितों को जमीन नहीं दी। मैं नीतीश कुमार को चैलेंज करता हूं, दलितों को दी गई जमीन पर उनका कब्जा नहीं है, अगर सरकार कब्जा दिखा देती है तो मुझे फांसी दे दिया जाए।'
हाल ही में जेडीयू छोड़ राजद में शामिल हुए श्याम रजक ने कहा कि 'नीतीश सरकार में दलितों पर अत्याचार का आंकड़ा बढ़ गया है। 2005 में यह सात फीसदी था अब वह बढ़कर 17 फीसदी हो गया है। बिहार दलितों के अत्याचार मामले में तीसरे स्थान पर है। मैं जो आंकड़ा दे रहा हूं वह भारत सरकार का आंकड़ा है।'