लोजपा की भाजपा के साथ नीतीश के खिलाफ संबंधी चुनावी रणनीति से जदयू पहले से खफा है। जदयू लगातार बागियों पर नियंत्रण करने और कार्रवाई करने की मांग कर रहा है। सियासी गलियारे में पहले से ही चर्चा है कि नीतीश को कमजोर करने के लिए भाजपा लोजपा का सहारा ले रही है। ऐसी स्थिति में अगर बागी अनुशासनात्मक कार्रवाई के बाद भी नहीं माने तो दोनों दलों के रिश्ते में खटास बढ़ने का अंदेशा है।
मोहिउद्दीन नगर से राजेश सिंह को इस बार भाजपा ने टिकट दिया है। पिछली बार वह इसी सीट से निर्दलीय चुनाव लड़े थे। फतूहा से सत्येंद्र सिंह को टिकट मिला है, वह पिछली बार लोजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। उजियारपुर के शील कुमार राय पहले भी चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन भाजपा से पहली बार टिकट मिला है।
बछवाड़ा से सुरेंद्र मेहता को पहली बार उम्मीदवार बनाया गया है। पिछली बार वह बेगूसराय से विधायक थे। इस बार उनकी सीट बदल गई है और बेगूसराय से कुंदन सिंह को पहली बार टिकट दिया गया है। मनेर से भाजपा ने करीब दो साल पहले भाजपा पार्टी में आए और प्रवक्ता निखिल आनंद को टिकट दिय है।
भागलपुर से भाजपा ने जिलाध्यक्ष रोहित पांडे को पहली बार टिकट देकर उतारा है, जबकि अमनौर से जदयू के पूर्व विधायक मंटू सिंह को पहली बार भाजपा का टिकट दिया गया है। यह सीट इस बार भाजपा के खाते में चली गई है और कुछ दिनों पहले ही वह जदयू छोड़कर भाजपा में आए थे।
उन्हें यह सीट भाजपा के वर्तमान विधायक चोकर बाबा उर्फ शत्रुघ्न तिवारी का टिकट काटकर दिया गया है। इस बार भाजपा से बागी होकर ये निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। सीवान से पूर्व सांसद ओमप्रकाश यादव चुनाव लड़ रहे हैं, वह पहली बार विधायक का चुनाव यहां से लड़ रहे हैं।
इससे पहले वह यहां से सांसद थे, लेकिन यह सीट जदयू के कोटे में चले जाने के कारण उनका टिकट कट गया था। दरौंधा से भाजपा ने पहली बार करनजीत सिंह को उम्मीदवार बनाया गया है। इससे पहले वह यहां के निर्दलीय चुनाव लड़ चुके हैं. हाजीपुर से पहली बार अवधेश सिंह को टिकट मिला है, वह पूर्व मंत्री वृशिण पटेल के भतीजे हैं।