बिहार में चुनावी सरगर्मी में इस समय अगर कोई व्यक्ति सबसे ज्यादा टेंशन में है तो वो हैं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। मुख्यमंत्री की दिक्कत ये है कि उनके पास पाने के लिए बहुत ज्यादा नहीं है लेकिन खोने के लिए काफी कुछ।
अगर वो चुनाव हारे तो उनके हाथ से मुख्यमंत्री की कुर्सी तो जाएगी ही आने वाले समय में उन्हें राजनीतिक वजूद बचाने के लिए भी जूझना पड़ सकता है। क्योंकि चुनाव हारते ही शायद ही कोई इस बात की गारंटी दे कि लालू यादव उनके साथ टिके रह पाएंगे।
और अगर चुनाव जीते और सीटों के गणित में वो राष्ट्रीय जनता दल से पिछड़े तो यह भी यकीन से नहीं कहा जा सकता कि राजनीति के घाघ खिलाड़ी लालू उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने देंगे। अपने बाद अपने बेटों को राजनीति में स्थापित करने की कवायद में जुटे लालू यादव इस मौके का फायदा अपने बेटों को आगे करके भी उठा सकते हैं।