बिहार न्यायिक सेवा संगठन (बीजेएसए)ने सोमवार को उत्तर प्रदेश पुलिस से नाराजगी जताते हुए कहा कि यूपी पुलिस ने अपने भाई के अंतिम संस्कार में शामिल होने जा रहे उनके एक सदस्य को बिहार की सीमा में प्रवेश करने से पहले पांच घंटे इंतजार कराया। संगठन ने कहा कि सदस्य के पास लॉकडाउन के दौरान यात्रा करने के लिए वैध पास भी था।
बीजेएसए के सचिन अजित कुमार सिंह ने बताया कि यूपी के देवरिया जिले की पुलिस ने सिवान के अतिरिक्त जिला व सत्र न्यायाधीश (एडीजे) रामायण राम को दो बार रोका। वह अपने परिवार के साथ थे और उन्हें गुथनी पुलिस थाने में घंटो बैठाए रखा गया। अजित कुमार ने कहा कि इस वजह से एडीजे के भाई के अंतिम संस्कार में भी देरी हुई। उन्होंने इस संबंध में कार्रवाई की मांग की।
सिंह ने कहा, 'वैध पास के साथ अपने छोटे भाई के अंतिम संस्कार में जा रहे एक न्यायिक अधिकारी को देवरिया पुलिस ने पांच घंटे तक गलत तरीके से रोके रखा। यह असंवेदनशील है और देवरिया पुलिस व देवरिया के एसपी के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।' उन्होंने कहा, देवरिया पुलिस ने सिवान जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी आधिकारिक आदेश को भी मानने से इनकार कर दिया जिसमें एडीजे को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में पहलवानपुर गांव की यात्रा करने की अनुमति दी गई थी।
बता दें कि शुक्रवार की शाम न्यायिक अधिकारी को देवरिया जिले में मेहरौना चेकपोस्ट पर रोके जाने पर वह गुथनी पुलिस स्टेशन गए। वहां मौजूद स्टेशन अधिकारी बाद में उन्हें चेकपोस्ट पर ले गए और यूपी पुलिस से आग्रह किया कि उन्हें प्रवेश की अनुमति दें। हालांकि, इसके बाद भी मेहरौना पुलिस ने यह कहते हुए प्रवेश देने से मना कर दिया कि सिवान में कोविड-19 के कई हॉटस्पॉट क्षेत्र हैं।